मुंबई की मोनोरेल नए फीचर्स से होगी लैस, ट्रेनों के बीच का समय घटाकर किया जाएगा 5 मिनट
मुंबई में बरसात के दौरान मोनोरेल कई बार बीच रास्ते में रुक गई। जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। 19 अगस्त को भक्ति पार्क और चेंबूर के बीच करीब 582 यात्री मोनोरेल में फंस गए थे, जिन्हें दमकल विभाग और क्रेन की मदद से बाहर निकालना पड़ा था। वहीं इसके कुछ दिन बाद 15 सितंबर को वडाला के पास एक और मोनोरेल अचानक बंद हो गई, जिसमें 17 यात्री फंस गए और उन्हें समानांतर रेक लाकर सुरक्षित उतारा गया।
वहीं लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद मोनोरेल प्रशासन ने बड़े पैमाने पर सुधार और आधुनिकीकरण शुरू कर दिया है। दरअसल कॉम्प्रिहेंसिव इंप्रूवमेंट प्रोग्राम ऑफ मोनोरेल के तहत तीन स्तरों पर काम हो रहा है। पहला, मोनोरेल में आधुनिक कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है, जो सुरक्षा को बढ़ाएगा और ट्रेनों की आवाजाही को और भी आसान बनाएगा।
वहीं दूसरा, नए रैक तेज़ी से जोड़े जा रहे हैं ताकि बेड़े को आधुनिक बनाया जा सके। और तीसरा, पुराने रैक को भी अपग्रेड किया जा रहा है ताकि उनकी कार्यक्षमता नए रैक के बराबर लाई जा सके। पहले मोनोरेल की रैक मलेशिया की कंपनी बनाती थी, लेकिन अब हैदराबाद की एक भारतीय कंपनी ने 10 नए रैक तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल शुरू होने के बाद ट्रेनों की टाइमिंग पर भी असर होगा।
दरअसल जहां पहले हर 15 से 18 मिनट में एक ट्रेन आती थी, वहीं अब इस अंतराल को घटाकर 5 मिनट करने की तैयारी की जा रही है। चूंकि ये रैक पूरी तरह भारत में बने हैं, इसलिए सर्विसिंग के दौरान लगने वाले इक्विपमेंट भी आसानी से उपलब्ध होंगे।
नए रैक और अपग्रेड सिस्टम में कई आधुनिक फीचर्स जोड़े जा रहे हैं, जैसे- मेक-इन-इंडिया डिज़ाइन, बेहतर राइड कम्फर्ट के लिए आधुनिक सस्पेंशन, अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित फायर सेफ्टी, माइक्रोप्रोसेसर-आधारित कंट्रोल सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, दिव्यांगों के लिए विशेष सीटें, 230 वोल्टेज एसी चार्जिंग पॉइंट, मल्टीलिंगुअल पैसेंजर इंफॉर्मेशन डिस्प्ले, डायनेमिक रूट मैप, फायर डिटेक्शन सिस्टम, नए कूपलर डिज़ाइन, टायर और बेयरिंग मॉनिटरिंग सिस्टम, नई मोटर और कंवर्टर टेक्नोलॉजी, एलईडी लाइटिंग, आधुनिक इंटीरियर्स और पूरे जीवनकाल तक स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता शामिल है।
वहीं मोनोरेल को 20 सितंबर यानी शनिवार से अस्थायी रूप से बंद किया जा रहा है ताकि बार-बार हो रही गड़बड़ियों का अध्ययन कर सुधार लाए जा सकें। इस दौरान नई ट्रेनें इंट्रोड्यूस करने और पुरानी ट्रेनों की ओवरहालिंग और रिपेयरिंग का काम होगा. उन्होंने कहा, ''मोनोरेल को अब वही आधुनिक सिस्टम मिलने वाला है जो मुंबई मेट्रो की नई लाइनों में है। ट्रेनों के बीच का समय घटाकर 5 मिनट किया जाएगा और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं जैसे वाई-फाई भी दी जाएंगी।