आंदोलन के एक साल बाद भी किसान हैं कि घर लौटते नहीं
संवाददाता/in24 न्यूज़.
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन का एक साल पूरा हो गया है। सरकार की तरफ से तीनों कृषि कानून वापस लेने के बावजूद किसानों का ें तबका अपनी ज़िद पर अड़ा हुआ है और घर जाने को तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति को देखते हुए देश की राजधानी दिल्ली की उन तमाम सीमाओं पर जहां बीते 12 महीनों से किसान प्रदर्शन कर रहे हैं वहां पुलिस की तरफ से सख्ती बढ़ा दी गई है तो वहीं दूसरी तरफ किसानों की भीड़ भी बढ़ गई है। आंदोलन के एक साल पूरा होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Pm Narendra Modi) की तरफ से तीनों कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद एसकेएम ने किसानों से दिल्ली बॉर्डर्स पर पहुंचने और आंशिक जीत उत्सव मनाने का आह्वान किया था। इस अपील का गुरुवार से ही अच्छा-खासा असर देखने को मिल रहा है। बता दें कि कुंडली-सिंधु बॉर्डर (kundli-sindhu border) पर किसानों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से शुरू होकर देर रात तक जारी रहा। हर एक घंटे में 15 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कुंडली बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। कानून वापस लिए जाने की घोषणा से किसान जोश में हैं, लेकिन एमएसपी समेत लंबित मांगों को भी नहीं भूले हैं। उनकी सरकार से उम्मीद भरी अपील है कि बाकी मांगों को जल्द ही पूरा किया जाए, ताकि वह घर लौट सकें। किसान आंदोलन के एक वर्ष पूरा होने पर और किसान के आज संसद कूच के ऐलान को देखते हुए दिल्ली के तीनों बॉर्डरों पर सुरक्षा बढ़ा दी घई है। दिल्ली पुलिस के सीनियर अफसर एक्शन मोड में आ गए हैं और बैठकों का दौर शुरू हो गया है। साथ ही इसपर पहले की तरह सियासत (Politics) भी जारी है। वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून, गन्ना बकाया भुगतान, बिजली अमेंडमेंट बिल समेत तमाम मुद्दों पर यूपी गेट पर किसानों की महापंचायत शुरू हो गई है। पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड और पंजाब से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे हैं। इसको ध्यान में रखते हुए दिल्ली सीमा में दोबारा पुलिस ने सीमेंटेड और लोहे के बैरिकेड लगाए हैं और सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। बता दें कि किसान नेता राकेश टिकैत लिखित आश्वासन की जिद पर अबतक अड़े हुए हैं।