भारत का किसान असहाय होता जाए ये स्थिति स्वीकार नहीं : पीएम मोदी
संवाददाता/in24 न्यूज़.
किसानों के आंदोलन के 23वें दिन किसानों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मध्यप्रदेश के रायसेन में किसान कल्याण कार्यक्रम को संबोधित किया. पीएम मोदी ने कहा कि बीते समय में ओले गिरने से मध्य प्रदेश के किसानों का नुकसान हुआ है. आज इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के ऐसे 35 लाख किसानों के बैंक खातों में 1600 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा रहे हैं. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि तेजी से बदलते हुए वैश्विक परिदृष्य में भारत का किसान, सुविधाओं के अभाव में, आधुनिक तौर तरीकों के अभाव में असहाय होता जाए, ये स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती. पहले ही बहुत देर हो चुकी है. जो काम 25-30 साल पहले हो जाने चाहिए थे, वो आज करने की नौबत आई है. बीते कई दिनों से देश में किसानों के लिए जो नए कानून बने, उनकी बहुत चर्चा है. ये कृषि सुधार, कानून रातों-रात नहीं आए. पिछले 20-22 साल से हर सरकार ने इस पर व्यापक चर्चा की है. कम-अधिक सभी संगठनों ने इन पर विमर्श किया है. उन्होंने कहा कि किसानों को उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो पहले अपने घोषणापत्रों में इन सुधारों की बात लिखते थे, बड़ी-बड़ी बातें करके किसानों के वोट बटोरते रहे. लेकिन अपने घोषणा पत्र में लिखे वादों को भी पूरा नहीं किया. सिर्फ इन मांगों को टालते रहे क्योंकि किसान उनकी प्राथमिकता नहीं था. पीएम ने कहा कि सरकार बार-बार पूछ रही है कि आपको कानून में किस धारा में क्या दिक्कत है, तो इन राजनीतिक दलों के पास कोई ठोस जवाब नहीं होता. जिनकी खुद की राजनीतिक जमीन खिसक गई है वो किसानों की जमीन चली जाएगी का डर दिखाकर अपनी राजनीतिक जमीन खोज रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की बातें करने वाले लोग कितने निर्दयी हैं इसका बहुत बड़ा सबूत है स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट. रिपोर्ट आई, लेकिन ये लोग स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को आठ साल तक दबाकर बैठे रहे. इन लोगों ने ये सुनिश्चित किया कि इनकी सरकार को किसान पर ज़्यादा खर्च न करना पड़े. अगर हमें एमएसपी हटानी ही होती तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते? हमारी सरकार एमएसपी को लेकर इतनी गंभीर है कि हर बार, बुवाई से पहले एमएसपी की घोषणा करती है. उन्होंने कहा कि नए कानून के बाद एक भी मंडी बंद नहीं हुई है. फिर क्यों ये झूठ फैलाया जा रहा है? सच्चाई तो ये है कि हमारी सरकार एपीएमसी को आधुनिक बनाने पर, उनके कंप्यूटरीकरण पर 500 करोड़ रुपए से ज़्यादा खर्च कर रही है. पीएम मोदी ने कहा क़ि हमने फाइलों के ढेर में फेंक दी गई स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को बाहर निकाला और उसकी सिफारिशें लागू कीं, किसानों को लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दिया. मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम ने किसानों को अपनी फसल को मर्जी से बेचने के लिए स्वतंत्र कर दिया है. जहां अच्छे दाम मिले वहां बेचो ,देश में बेचो पूरे राज्यों में कहीं भी बेचो. तीनों क़ानूनों में क्या बुरा है? कांग्रेस घड़ियाली आंसू बहा रही है. बता दें कि सरकार अब भी लगातार किसानों को समझाने में लगी है कि वह विपक्ष के बहकावे में न आएं और