भारत में 3.75 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड व्यापार, चीन को हुआ लाखों करोड़ का नुकसान
13 Nov, 2023
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ब्यूरो रिपोर्ट/in24न्यूज़/मुंबई
भारत में इस साल दीपावली के मौके पर लगभग 3.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रिकॉर्ड तोड़ व्यापार हुआ. यह जानकारी कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने आज एक संयुक्त वक्तव्य में दी. उन्होंने कहा कि सभी त्योहारों पर ग्राहकों द्वारा जमकर भारतीय वस्तुओं की खरीदारी की गई, जबकि गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ पूजा एवं तुलसी विवाह का त्यौहार अभी शेष हैं, जिनमें लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपये के और व्यापार होने की संभावना है. वहीं इस बार दिवाली पर्व के मौके पर चीन को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज़्यादा के व्यापार का बड़ा नुकसान हुआ है. वैसे तो पिछले कई वर्षों में दिवाली त्यौहारों पर चीन से बनी वस्तुओं को भारत का लगभग 70% बाजार मिल जाता था, लेकिन इस बार बिलकुल भी देखने नहीं मिला. देश में किसी भी व्यापारी ने इस साल चीन से दिवाली संबंधित किसी भी वस्तु का कोई इंपोर्ट नहीं किया. साफ़ तौर पर यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान का असर है. कैट ने देश भर में इस दिवाली "भारतीय उत्पाद-सबका उस्ताद" अभियान चलाया, जो बेहद सफल रहा. देश भर में इस बार की दीपावली में ग्राहकों का बड़ा समर्थन मिला. भरतिया एवं खंडेलवाल ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार 3.5 लाख करोड़ के त्योहारों के व्यापार में लगभग 13% खाद्य एवं किराना में, 9% ज्वेलरी में, 12% वस्त्र एवं गारमेंट, 4% ड्राई फ्रूट, मिठाई एवं नमकीन, 3% घर की साज सज्जा, 6% कॉस्मेटिक, 8% इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मोबाइल, 3% पूजन सामग्री एवं पूजा वस्तुओं, 3% बर्तन तथा रसोई उपकरण, 2% कन्फेक्शनरी एवं बेकरी, 8% गिफ्ट आइटम्स, 4% फ़र्निशिंग एवं फर्नीचर एवं शेष 20% ऑटोमोबाइल, हार्डवेयर, इलेक्ट्रिकल, खिलौने सहित अन्य अनेक वस्तुओं एवं सेवाओं पर ग्राहकों द्वारा खर्च किए गए. देश भर में पैकिंग कारोबार को भी एक बड़ा बाजार इस दिवाली पर मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिवाली त्योहार पर लोकल बनी वस्तुएं खरीदने का आह्वान किया गया था, जिसका बड़ा प्रभाव पूरे देश में दिखाई दिया. देश के सभी शहरों के स्थानीय निर्माताओं, कारीगरों एवं कलाकारों द्वारा बनाए गए उत्पादों की भारी मात्रा में बिक्री हुई, जिससे आत्मनिर्भर भारत की एक विशिष्ट झांकी दिवाली पर्व के ज़रिए देश एवं दुनिया को दिखाई गई. तो कुल मिलाकर इस बार की दीपावली भारतवासियों के लिए खास रही, जिसमें भारतवासियों ने वोकल फॉर लोकल पर ज्यादा जोर दिया.