मन की बात में बोले पीएम मोदी आत्मनिर्भर भारत अभियान देश को नई ऊंचाई पर ले जाएगा
संवाददाता/in24 न्यूज़.
मन की बात के 65वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया. कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए अपने विचार रखे. आज से लॉकडाउन का चौथा चरण खत्म हो रहा है और लॉकडाउन 5.0 की शुरुआत सोमवार से होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम के 65वें भाग में एक बार फिर से देशवासियों को संबोधित किया। पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि देश में इकॉनमी का बड़ा हिस्सा फिर से खुल गया है। ऐसे में बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए। गांवों में हमारी बेटियां हजारों की संख्या में मास्क बना रही हैं। कितने ही उदाहरण रोजाना दिखाई और सुनाई देते हैं। लोग अपने प्रयासों के बारे में मुझे नमो ऐप के जरिए बता रहे हैं। कई बार मैं समय की कमी के चलते नाम नहीं ले पाता हूं। ऐसे सभी लोगों की मैं प्रशंसा करता हूं। इस दौरान पढ़ाई के क्षेत्र में भी कई अलग अलग इनोवेशन शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर किए हैं। ऑनलाइन क्लासों को शुरू किया गया है। कोरोना की दवा पर हमारी लैब में जो काम हो रहा है, उसपर पूरी दुनिया की नजर है। देश में, सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है। हमारी जनसंख्या ज्यादातर देशों से कई गुना ज्यादा है, फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के अन्य देशों में फैला। आपने देखा होगा, कि दूसरों की सेवा में लगे व्यक्ति के जीवन में, कोई डिप्रेशन या तनाव, कभी नहीं दिखता। उसके जीवन में, जीवन को लेकर उसके नजरिए में, भरपूर आत्मविश्वास, सकारात्मकता और जीवंतता प्रतिपल नजर आती है। जब मैंने पिछली बार आपसे मन की बात की थी, तब यात्री ट्रेनें बंद थीं, बसें बंद थीं, हवाई सेवा बंद थी। इस बार, बहुत कुछ खुल चुका है। श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं, अन्य स्पेशल ट्रेनें भी शुरू हो गई हैं। तमाम सावधानियों के साथ, हवाई जहाज उड़ने लगे हैं, धीरे-धीरे उद्योग भी चलना शुरू हुआ है, यानी, अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अब चल पड़ा है, खुल गया है। ऐसे में, हमें और ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। हमारे रेलवे के साथी दिन-रात लगे हुए हैं। केंद्र, राज्य, स्थानीय स्वराज की संस्थाएं- दिन-रात मेहनत कर रहें हैं। जिस प्रकार रेलवे के कर्मचारी आज जुटे हुए हैं, वे भी एक प्रकार से अग्रिम पंक्ति में खड़े कोरोना वॉरियर्स ही हैं। लाखों श्रमिकों को, ट्रेनों, बसों से सुरक्षित ले जाना, उनके खाने-पाने की चिंता करना, हर जिले में क्वारंटीन केंद्रों की व्यवस्था, सभी की टेस्टिंग, चेकअप, उपचार की व्यवस्था, ये सब काम लगातार चल रहे हैं और बड़ी मात्रा में चल रहे हैं। साथियो, जो दृश्य आज हम देख रहे हैं, इससे देश को अतीत में जो कुछ हुआ, उसके अवलोकन और भविष्य के लिए सीखने का अवसर भी मिला है। आज, हमारे श्रमिकों की पीड़ा में, देश के पूर्वी हिस्से की पीड़ा को देख सकते हैं। उस पूर्वी हिस्से का विकास बहुत आवश्यक है। जैसे, कहीं श्रमिकों की स्किल मैपिंग का काम हो रहा है, कहीं स्टार्टअप्स इस काम में जुटे हैं, कहीं माइग्रेशन कमिशन बनाने की बात हो रही है। केंद्र सरकार ने अभी जो फैसले लिए हैं, उससे गांवों में रोजगार, स्वरोजगार, लघु उद्योगों से जुड़ी विशाल संभावनाएं खुली हैं। अगर, हमारे गांव, कस्बे, जिले, राज्य, आत्मनिर्भर होते, तो अनेक समस्याओं ने, वो रूप नहीं लिया होता, जिस रूप में वो आज हमारे सामने हैं। मुझे पूरा भरोसा है आत्मनिर्भर भारत अभियान, इस दशक में देश को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। कोरोना संकट के इस दौर में मेरी, विश्व के अनेक नेताओं से बातचीत हुई है, लेकिन, मैं एक सीक्रेट बताना चाहूंगा- विश्व के अनेक नेताओं में इन दिनों, बहुत ज्यादा दिलचस्पी योग और आयुर्वेद के संबंध में होती है। हर जगह लोगों ने योग और उसके साथ-साथ आयुर्वेद के बारे में और ज्यादा जानना चाहा है। कितने ही लोग हैं जिन्होंने कभी योग नहीं किया, वे भी ऑनलाइन योगा क्लास से जुड़ गए हैं या ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से योग सीख रहे हैं। कोरोना संकट के इस समय में योग- आज इसलिए भी ज्यादा अहम है, क्योंकि ये वायरस, हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम को सबसे अधिक प्रभावित करता है। योग में तो रेस्पिरेटरी सिस्टम को मजबूत करने वाले कई तरह के प्राणायाम हैं। ये टाइम टेस्टिड टेक्नीक हैं। ‘कपालभाती’ और ‘अनुलोम-विलोम’, ‘प्राणायाम’ से अधिकतर लोग परिचित होंगे। लेकिन ‘भस्त्रिका’, ‘शीतली’, ‘भ्रामरी’ जैसे कई प्राणायाम के प्रकार हैं, जिसके, अनेक लाभ भी हैं। आपके जीवन में योग को बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने भी इस बार एक अनोखा प्रयोग किया है। मेरा आपसे अनुरोध है, आप सभी, इस प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में आप हिस्सेदार बनिए। हमारे देश में, करोडों-करोड़ गरीब, दशकों से एक बहुत बड़ी चिंता में रहते आए हैं कि अगर बीमार पड़ गए तो क्या होगा? इस तकलीफ को समझते हुए, इस चिंता को दूर करने के लिए ही, करीब डेढ़ साल पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई थी। कुछ ही दिन पहले आयुष्मान भारत के लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ के पार हो गई है। एक करोड़ से ज्यादा मरीज मतलब नॉर्वे जैसा देश, सिंगापुर जैसा देश, उसकी जो कुल जनसंख्या है उससे दो गुना लोगों को मुफ्त में इलाज दिया गया है। आयुष्मान भारत योजना के साथ एक बड़ी विशेषता पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी है पोर्टेबिलिटी ने देश को एकता के रंग में रंगने में भी मदद की है यानी बिहार का कोई गरीब अगर चाहे तो उसे कर्नाटका में भी वही सुविधा मिलेगी जो उसे अपने राज्य में मिलती। कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भी हमारे देश में काफी कम है। लेकिन जो नुकसान हुआ उसका हमें दुख है। हम जो कुछ भी बचा पाए, वो निश्चित तौर पर देश की सामूहिक संकल्पशक्ति का ही परिणाम है। इतने बड़े देश में हर-एक देशवासी ने खुद इस लड़ाई को लड़ने की ठानी है। ये पूरी मुहिम पीपुल ड्रिवेन है। बतादें कि पीएम मोदी हर महीने के अंतिम रविवार को रेडियो के जरिए 'मन की बात' कार्यक्रम करते हैं। इसके जरिए पीएम कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोगों को संबोधित करते हैं।