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संपत्ति के मुद्दे पर पर बिहार में अफसरों पर लगाम लगाने की तैयारी

01 Jul, 2021 791

संवाददाता/in24 न्यूज़.
बिहार में अब संपत्ति के मुद्दे पर अफसरों पर लगाम लगाने की तैयारी हो रही है। सरकार की ओर से सरकारी अफसरों और कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति क्रय- विक्रय को लेकर एक बार फिर से सचेत किया है। इस संबंध में मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रधान सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और सभी डीएम को पत्र लिखा है। मुख्य सचिव ने पत्र के माध्यम से बताया कि सरकारी सेवकों द्वारा चल- अचल संपत्ति के क्रय- विक्रय के संबंध में सरकारी सेवक आचरण नियमावली बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से भी 25 मार्च 2021 को निर्देश जारी किये हैं। फिर भी सामने आ रहा है कि इन प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इसको लेकर मुख्य सचिव ने स्पष्ट तौर पर चेताया है कि जो सरकारी अधिकारी या कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं देते हैं तो ऐसे सरकारी सेवकों के खिलाफ अनुशासनिक एवं प्रिवेंशन एवं करप्शन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जायेगा।  मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने पत्र में लिखा है कि सरकारी कर्मचारी को अपनी प्रथम नियुक्ति के समय व उसके बाद हर एक 12 महीनों के अंतराल पर अपनी संपत्तियों एवं दायित्वों की विवरणी देना होगा। जिसमें संपत्ति का पूरा ब्योरा रहेगा। स्थाई संपत्ति जो कर्मचारी की अपनी हो या उसने अर्जित की हो या उसे विरासत में मिली हो या परिवार के किसी सदस्य के नाम से या किसी अन्य व्यक्ति के नाम से पट्टे या बंधक पर उसके द्वारा धारित हो, इसकी भी जानकारी देनी होगी। सरकारी सेवक को शेयर, ऋण पत्र, नगद नकद जो उसने अर्जित की हो या विरासत में पाए हों या उसके परिवार के नाम से हो इसकी भी जानकारी देनी है। उन्होंने पत्र में कहा कि अन्य चल संपत्ति जो सरकारी कर्मचारी को विरासत में मिली हो या खुद अर्जित की हो, प्रत्यक्ष या परोक्ष यदि ऋण और दायित्व हो तो उसका भी विवरण दिया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी अधिकारी व कर्मचारी सरकार को पूर्व सूचना दिए बिना किसी अचल संपत्ति का अर्जन या निबटाव अपने नाम से या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से पट्टे- बंध पत्र की खरीद-बिक्री या प्रीतिदान के द्वारा नहीं करेगा। वहीं पत्र में कहा गया है कि सरकारी सेवक कोई संपत्ति जिसका मूल्य सरकारी सेवक के 2 महीने के मूल वेतन जोड़ ग्रेड वेतन से ज्यादा हो यदि ऐसा करता है तो 1 महीने के अंदर सरकार को सूचना देनी होगी। पत्र के मुताबिक वांछित विवरण समय पर नहीं सौंपने वाले सरकारी सेवकों का वेतन भुगतान सरकार रोक सकेगी। समय पर विवरण समर्पित नहीं करना सरकारी कर्तव्य पालन में गंभीर अपराध माना जाएगा। यानी तय है कि बिहार में सरकारी अफसरों में घमासान शुरू होने वाला है।

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