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मराठी अनिवार्यता पर सियासत तेज, रितेश देशमुख ने फैसले का किया समर्थन!

23 Apr, 2026 126

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रही बहस अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। और इस मुद्दे ने सियासत से लेकर सड़क तक माहौल गरमा दिया है। टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले पर जहां एक तरफ विरोध देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार और कई बड़े चेहरे खुलकर इसके समर्थन में सामने आ रहे हैं। 

इसी बीच बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख ने भी इस फैसले का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति महाराष्ट्र में काम करता है, खासकर पब्लिक सर्विस जैसे ऑटो या टैक्सी चलाता है, तो उसे मराठी भाषा का ज्ञान होना ही चाहिए। उनके मुताबिक यह सिर्फ नियम नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मामला है।

दरअसल, यह पूरा विवाद राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि जो ऑटो-रिक्शा या टैक्सी चालक मराठी नहीं जानते, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब इस फैसले को और कड़ा करते हुए यह साफ कर दिया गया है कि 1 मई से नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा, और जो ड्राइवर मराठी भाषा नहीं जानते, उनके खिलाफ कार्रवाई यहां तक कि लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। इस ऐलान के बाद कई जगह ऑटो और टैक्सी चालकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया है। कुछ संगठनों का कहना है कि अचानक इस तरह का नियम लागू करना उनके लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है, खासकर उन चालकों के लिए जो दूसरे राज्यों से आकर यहां काम कर रहे हैं। 

हालांकि सरकार का रुख साफ है, पब्लिक सर्विस में भाषा का ज्ञान जरूरी है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी दौरान एक और अहम अपडेट सामने आया है,  महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम ने रितेश देशमुख और उनकी पत्नी जेनेलिया देशमुख को अपना ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। इस मौके पर रितेश देशमुख ने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को याद करते हुए एसटी बसों से जुड़ी कई भावनात्मक यादें साझा कीं। रितेश ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की एसटी बसें सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं, बल्कि राज्य की पहचान का हिस्सा हैं। 

उन्होंने परिवहन विभाग की नई योजनाओं, खासतौर पर इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने की पहल की भी सराहना की और इसे पर्यावरण के लिहाज से बड़ा कदम बताया इसके साथ ही उन्होंने सड़क सुरक्षा पर भी जोर दिया और ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। कुल मिलाकर तस्वीर साफ है मराठी भाषा को लेकर शुरू हुआ यह मुद्दा अब सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं रहा। बल्कि बन चुका है भाषा, पहचान और राजनीति का बड़ा मुद्दा। 

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