नसबंदी नहीं तो नौकरी नहीं : कमलनाथ
संवाददाता/in24 न्यूज़.
कमलनाथ सरकार ने एक मध्य प्रदेश में एक अजीबो-गरीब फरमान जारी किया है. मध्य प्रदेश सरकार के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने राज्य के स्वास्थ्य कर्मचारियों को फरमान जारी किया है कि कम से कम एक सदस्य की नसबंदी करानी पड़ेगी. फरमान में यह भी कहा गया है कि ऐसा नहीं किया तो उनको वीआरएस दिया जाएगा. कमल नाथ सरकार ने पुरुष नसबंदी का लक्ष्य पूरा न होने पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के वेतन में कटौती और जबरन सेवानिवृत्ति देने का आदेश दिया है. फरमान में कहा गया है कि टारगेट पूरा ना करने पर 'नो पे, नो वर्क' के आधार और सैलरी भी नहीं दी जाएगी. दरअसल, सरकार ने परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिये पांच से दस पुरुषों की नसबंदी कराना अनिवार्य किया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सरकार ने कर्मचारियों के लिए हर महीने 5 से 10 पुरुषों का नसंबदी ऑपरेशन करवाना अनिवार्य कर दिया है. परिवार नियोजन अभियान के तहत जिलों को कुल आबादी के 0.6 फीसदी नसबंदी ऑपरेशन का टारगेट हर साल दिया जाता है. इसका टारगेट पूरा न होने पर मिशन संचालक छवि भारद्धाज ने नाराजगी जताई. उन्होंने सभी कलेक्टर और सीएमएचओ को पत्र लिखकर कहा है कि प्रदेश में मात्र 0.5 प्रतिशत पुरुष नसबंदी की जा रही है. उन्होंने कहा कि विभाग के पुरुषकर्मियों को जागरुकता अभियान के तहत परिवार नियोजन का टारगेट दिया जाए. इस पत्र के बाद सीएमएचओ ने एक पत्र जारी किया, उन्होंने कहा है कि टारगेट के तहत काम नहीं किया तो अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव भेजेंगे.