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मध्य रेलवे की लेटलतीफी से मुंबईकर बेहाल, तकनीकी खराबी ने बढ़ाई यात्रियों की परेशानी

26 Oct, 2026 12

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवाएं सोमवार को तकनीकी खराबी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुईं। मध्य रेलवे की उपनगरीय सेवाओं पर एक ही सुबह में दो अलग-अलग तकनीकी समस्याओं का असर देखने को मिला। मुलुंड और ठाणे रेलवे स्टेशनों के बीच ओवरहेड वायर में खराबी तथा कांजूरमार्ग स्टेशन के रिले रूम से धुआं निकलने की घटना के चलते सिग्नल व्यवस्था प्रभावित हुई। इससे कई लोकल ट्रेनें देरी से चलीं और यात्रियों को स्टेशनों पर लंबा इंतजार करना पड़ा।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 9 बजकर 23 मिनट पर मुलुंड और ठाणे के बीच तकनीकी समस्या सामने आई। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे संबंधित हिस्से में आपातकालीन पावर ब्लॉक लिया गया और बिजली आपूर्ति बंद कर तकनीकी खराबी को दूर करने का काम शुरू किया गया। रेलवे की तकनीकी टीम ने लगातार प्रयास कर सुबह करीब 10 बजकर 40 से 48 मिनट के बीच ओवरहेड वायर से जुड़ी समस्या को दूर कर लिया। इसके बाद रेल यातायात को सामान्य करने के प्रयास शुरू किए गए।

इसी दौरान कांजूरमार्ग स्टेशन के रिले रूम में धुआं निकलने की घटना सामने आई। रिले रूम रेलवे की सिग्नल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यहां तकनीकी गड़बड़ी होने पर ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए सिग्नल व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इस घटना के कारण विक्रोली-भांडुप और ठाणे-मुलुंड के बीच कुछ सिग्नल संकेत प्रभावित हुए। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों को सावधानीपूर्वक और धीमी गति से चलाना पड़ा।

दोनों तकनीकी समस्याओं का असर मध्य रेलवे के व्यस्त उपनगरीय नेटवर्क पर पड़ा। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से कल्याण, कसारा, कर्जत और खोपोली की ओर जाने वाली कई लोकल ट्रेनें निर्धारित समय से पीछे चलने लगीं। शुरुआती तौर पर कुछ सेवाओं में 15 से 20 मिनट की देरी हुई, जबकि यातायात बाधित होने के कारण कई यात्रियों को अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा।

ट्रेनों की लेटलतीफी का असर मुलुंड, ठाणे, घाटकोपर, विक्रोली, भांडुप और डोंबिवली जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भी दिखाई दिया। प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगी। दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और रोजाना लोकल से सफर करने वाले लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेनों के लंबे समय तक रास्ते में खड़े रहने से एसी लोकल के यात्रियों को भी दिक्कतें हुईं।

स्थिति बिगड़ने पर कुछ यात्री ट्रेनों से उतरकर रेलवे ट्रैक पर पैदल चलते दिखाई दिए। हालांकि, रेलवे ट्रैक पर चलना बेहद जोखिम भरा है और यात्रियों को ऐसा करने से बचना चाहिए। किसी भी तरह की बाधा या ट्रेन में फंसने की स्थिति में रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

मुंबई की लोकल ट्रेनें प्रतिदिन लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। ऐसे में सिग्नल या ओवरहेड वायर से जुड़ी छोटी-सी तकनीकी खराबी भी पूरे रेल नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है। एक हिस्से में परिचालन बाधित होने से दूसरी सेवाओं पर दबाव बढ़ता है और ट्रेनों की समय-सारणी बिगड़ जाती है।

सोमवार की घटना ने एक बार फिर मध्य रेलवे की उपनगरीय सेवाओं में तकनीकी विश्वसनीयता और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यात्रियों के लिए समय पर ट्रेन मिलना केवल सुविधा का मामला नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। ऐसे में जरूरी है कि रेलवे तकनीकी समस्याओं का समय रहते समाधान करे और आपात स्थिति में यात्रियों को सटीक जानकारी उपलब्ध कराए, ताकि मुंबईकरों का सफर सुरक्षित और सुचारु बना रहे।

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