Breaking News

किसान आंदोलन की वजह से अनेक पेट्रोल पंप पड़े ठप

17 Jan, 2021 1097

संवाददाता/in24 न्यूज़.  
सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई हल नहीं निकला है, इससे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं आंदोलन स्थल के पास के पेट्रोल पंप. बता दें कि तीन नये कृषि कानूनों पर पिछले 52 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का धरना जारी है। लेकिन अब दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर स्थित कई पेट्रोल पंप को इस आंदोलन की मार झेलनी पड़ रही है। किसान आंदोलन के कारण पेट्रोल पंप का काम ठप हो गया है। यहां काम करने वाले कर्मियों को अपनी नौकरी जाने का खतरा सता रहा है। सिंघु बॉर्डर पर बीते साल 26 नवंबर से बॉर्डर के आसपास के पेट्रोल पंप बंद हैं, जिसके कारण पंपों को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन के चलते मार्ग को बंद कर दिया गया है। गाड़ियों के आवागमन पर पूरी तरह रोक लग चुकी है। आंदोलन के चलते पुलिस विभाग द्वारा मार्गों को डाइवर्ट कर दिया है। मार्गों पर गाड़ियों के न चलने से पेट्रोल पंप खाली पड़े हैं। पेट्रोल पंप के स्टाफ ने जानकारी दी कि, फिलहाल पंप बिल्कुल बंद है, 26 नवंबर से ही पंप को बंद कर दिया गया। गाड़ियां आ नहीं पा रही। पंप कर्मचारी इस आंदोलन के जल्द खत्म होने की उम्मीद में बैठे हैं। दरअसल पेट्रोल पंप बंद होने के कारण कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ने लगा है। कुछ पेट्रोल पंप पर पिछले महीने की आधी ही सैलरी दी जा सकी है। अगर बातचीत से मामला जल्द नहीं सुलझा, तो ऐसी स्थिति में और भी पेट्रोल पंपों को इस तरह की कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। सिंघु बॉर्डर स्थित ओम सर्विस स्टेशन पेट्रोल पंप के मैनेजर राजेन्द्र सिंह ने आईएएनएस को बताया, 52 दिनों में अब तक करीब 40 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। भविष्य में जब तक ये रास्ता नहीं खुला तो हमारे सामने चुनोतियां ही चुनौतियां हैं। हमारे इस पंप पर करीब 35 कर्मचारी है, इनकी सैलरी पर भी असर पड़ने लगा है। अभी तो तनख्वाह दे दी है यदि ऐसा ही रहा तो आगे तनख्वाह इन्हें मिलेगी या नहीं मिलेगी कह नहीं सकते।उन्होंने आगे बताया, हमारे पंप पर अभी 70 हजार लीटर डीजल का स्टॉक है और 30 हजार लीटर पेट्रोल का स्टॉक है। बॉर्डर स्थित हर एक पंप पर करीब पेट्रोल 6 हजार लीटर, डीजल 12 हजार लीटर और 9 हजार किलो सीएनजी हर दिन गाड़ियों में डलती थी, जो कि अब शून्य हो चुकी है। भारत सर्विस स्टेशन के सुपरवाइजर राम प्रसाद ने आईएएनएस को बताया, 26 नवंबर से अब तक एक लीटर तेल नहीं बिका है। गाडियों को नहीं आने देंगे तो तेल बिकेगा कहां से? जब तेल नहीं बिकेगा तो मालिक तनख्वाह कहां से देंगे? 44 कर्मचारी फिलहाल पंप पर काम कर रहें हैं। सभी इसी उम्मीद में है कि जल्द कोई रास्ता निकले और पंप फिर से शुरू हो जाए। सिंघु बॉर्डर पर एक साथ 6 पेट्रोल पंप मौजूद हैं, जो कि पूरी तरह से बंद पड़े हैं। इन 52 दिन में सभी पेट्रोल पंप को मिलाकर करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। आगे यह खतरा कबतक बरक़रार रहने वाला है इस बारे में किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है.

अन्य खबरे