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बकरीद पर बवाल, कुर्बानी पर छिड़ी बहस

04 Jun, 2025 155

ईद-उल-अजहा यानी बकरीद मुस्लिम समुदाय में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है। मुस्लिम समुदाय के लोग इसे बेहद उत्साह के साथ मनाते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने जुल-हिज्जा के दसवें दिन मनाए जाने वाले इस त्योहार पर देश-विदेश में खास रौनक देखने को मिलती है। 

बकरीद के दिन कुर्बानी देने की परंपरा है। आमतौर पर बकरे की कुबार्नी दी जाती है। वहीं कुर्बानी का हिस्सा रिश्तेदारों, मित्रों और गरीब और जरूरतमंदों के साथ बांटा जाता है। दरअसल ये पर्व कुर्बानी के साथ-साथ अल्लाह के प्रति समर्पण का भी प्रतीक है।  आपको बता दें कि ईद-उल-अजहा की तारीख सऊदी अरब में चांद दिखने के बाद ही तय की जाती है। 

इस बार सऊदी अरब में 27 मई को जुल-हिज्जा का चांद दिखाई दिया है, जिसके बाद ये तय हुआ है कि सऊदी अरब में 6 जून और भारत में 7 जून को क़ुरबानी का ये त्यौहार मनाया जाएगा। लेकिन भारत में बकरीद को लेकर घमासान मचा हुआ है। 

महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक सियासत शुरू हो गई है। एक तरफ हिंदू पक्ष के लोग हैं जो ये कह रहे हैं कि बेजुबानों की कुर्बानी देना कहा तक जायज हैं तो वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष है जो सवाल उठा रहा है कि आखिर क्यों एक ही दिन लोगों का पशु प्रेम जागता है। 

देश में जब कोई त्यौहार आता है तो सियासत भी शुरू हो जाती है। आने वाले दो दिनों में कुर्बानी का ये त्यौहार मनाया जाने वाला है, जिसको लेकर सियासत अपने चरम पर है और नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। दरअसल इसकी शुरुआत विश्व हिंदू परिषद ने की है। वीएचपी का कहना है कि इको फ्रेंडली बकरीद मनाई जाए और कुर्बानी के नाम पर होने वाली हिंसा, क्रूरता और अवैध गतिविधि पर रोक लगे। 

बीजेपी नेताओं और धर्मगुरुओं का कहना है कि जैसे दिवाली होली और गणपति जैसे बड़े त्योहारों को इको फ्रेंडली तरीके से मनाया जाता है उसी तरीके से कुर्बानी के त्यौहार को भी इको फ्रेंडली मनाया जाए। वहीं हिंदूवादी संगठनों की इस मांग पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। 

दरअसल मुस्लिम समुदाय का कहना है कि ईद उल अज़हा यानी बकरीद में हर साहिब-ए-हैसियत मुसलमान पर कुर्बानी करना वाजिब है। कुर्बानी करना कोई रस्म नहीं बल्कि खुदा पाक की पसंदीदा इबादत है। हालांकि वीएचपी का कहना है कि कुर्बानी की बर्बर परंपरा को लेकर एक बेचैनी महसूस की जा रही है। वहीं वीएचपी के आलावा बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भी मुसलमानों की कुर्बानी और हिंदू धर्म में होने वाली बलि प्रथा का विरोध किया है। 

बीजेपी के विधायक नंद किशोर गुर्जर ने तो यहां तक कह दिया कि जानवर की कुर्बानी देने से बेहतर केक पर पशु बनाकर काटा जाए। बकरीद को लेकर यूपी सरकार की तरफ से कई गाइडलाइंस जारी की गई हैं। वहीं बकरीद को लेकर महाराष्ट्र में भी खूब हंगामा हो रहा है। 

बीजेपी के फायरब्रांड नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने न सिर्फ सलाह दी बल्कि धमकाते भी नजर आए। आपको बता दें कि सीएम देवेंद्र फडणवीस जहां सुरक्षा को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक में व्यस्त हैं। वहीं बीजेपी नेता ने मुस्लिम समुदाय को वर्चुअल बकरीद मनाने की सलाह दी है। 

नितेश राणे का कहना है कि जब हिंदू त्योहार वर्चुअली मनाए जा सकते हैं तो बकरीद क्यों नहीं? इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि अगर किसी समाज में जबरन बकरे काटे गए तो महाराष्ट्र की हिंदुत्ववादी सरकार उसे छोड़ने वाली नहीं है। राणे ने धमकी देते हुए कहा कि यह किसी के अब्बा का लाहौर नहीं है, यह हमारा हिंदू राष्ट्र है। 

वहीं राणे के बयान पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने पलटवार किया है। अबू आजमी ने इस पूरे मुद्दे पर बीजेपी विधायक नितेश राणे पर भी सीधा हमला बोला और कहा कि नितेश राणे को शायद  ये नहीं पता कि मुसलमानों का धार्मिक संविधान 1400 साल पहले लिखा जा चुका है और भारतीय संविधान उसे मानने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि मुसलमान पहले भी बकरीद मनाता आया है, आज भी मना रहा है और भविष्य में भी मनाता रहेगा। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह नितेश राणे हो या उनसे बड़ा, इस पर रोक नहीं लगा सकता है। 

समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने कहा कि नफरत की सियासत की जा रही है। आजमी ने कहा कि कहा कि देश संविधान से चलेगा, न कि नफरत की राजनीति से राणे के बयान पर एनसीपी एसपी के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने भी पलटवार किया है। उन्होंने राणे पर तंज कसते हुए कहा कि ‘महाराष्ट्र के नेता बहुत तकनीकी रूप से डेवलप कर गए हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग कल को कहेंगे कि भोजन भी वर्चुअल रूप से खाना चाहिए। शायद हमें वर्चुअल भोजन खाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। 

कुल मिलाकर बकरीद पर जुबानी जंग तेज हो गई है। एक तरफ हिंदू धर्म के पैरोकार हैं जो बेजुबानों की कुर्बानी का विरोध कर रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष है जो ये कह रहा है कि कुर्बानी इस्लाम का हिस्सा और शरीयत में भी लिखा हुआ है। 

बता दें कि महाराष्ट्र में कृषि उपज मंडी समितियों को पशु बाजार बंद रखने का आदेश दिया था, जिससे मुस्लिम समाज में नाराजगी फैल गई थी। वहीं इस मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और अपनी चिंता व्यक्त की। 

सीएम से बैठक के बाद अबू आजमी ने बताया कि सीएम फडणवीस ने भरोसा दिया है कि हर बार की तरह इस बार भी बकरीद पर सभी जरूरी सहूलियतें दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाएगा और बाजार बंद रखने का प्रस्ताव वापस ले लिया गया है। 

साथ ही कुर्बानी के जानवरों पर लगने वाली 200 रुपये की फीस घटाकर 20 रुपये करने का फैसला लिया गया है। अबू आजमी ने कहा कि  कुछ लोग हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा बनाकर बकरीद का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 
 

महाराष्ट्र में बकरीद को लेकर जारी बवाल के बीच विपक्ष ने  सरकार पर  बड़ा आरोप लगाया है। दरअसल विपक्षी नेताओं का कहना है कि बीएमसी चुनाव में फायदा हासिल करने के लिए बीजेपी बकरीद के नाम पर सांप्रदायिक बटवारा कर रहे है। वहीं सीएम फडणवीस ने बैठक कर त्यौहार के मद्देनजर सभी अधिकारियो और पुलिस प्रशासन को सतर्क रहने, असामाजिक तत्वों पर नजर रखने और कानून व्यवस्था को बनाए रखने का निर्देश दिया है।  

वहीं उत्तर प्रदेश के सीएम ने सभी 75 जिलों के एसपी और डीएम के साथ बैठकर कई निर्देश जारी किए हैं। सीएम योगी संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च करने, ड्रोन से निगरानी रखने, खुले में कुर्बानी न देने, कुर्बानी वाली जगह पर साफ सफाई रखने और कुर्बानी के बाद मांस को ढक रखने के निर्देश दिए हैं। 

हालांकि जारी बवाल के बीच मुस्लिम धर्म गुरुओं ने बकरीद को लेकर कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने सभी से नियमों के दायरे में रहकर कुर्बानी का त्यौहार मानाने की अपील की है। उन्होंने लोगों को हिदायत दी है कि न तो प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी दे और न ही सोशल मीडिया पर किसी प्रकार की तस्वीरें अपलोड करें। 
लेकिन बकरीद से पहले आर्थिक राजधानी मुंबई में भी बवाल मचा हुआ है। दरअसल घाटकोपर इलाके में स्थित मैत्री पार्क बिल्डिंग में 29 मई को उस वक्त विवाद हो गया जब वहां रहने वाले हिंदू परिवारों ने बकरे की कुर्बानी का विरोध किया। हिंदू पक्ष के लोग मामले को लेकर पुलिस के पास पहुंच गया है। आपको बता दें कि मैत्री पार्क सोसायटी में करीब 170 परिवार रहते हैं, जिसमे से 40 परिवार मुस्लिम है। 

हिंदू पक्ष के परिवारों का आरोप है कि हर साल बकरीद के दौरान सोसायटी में गंदगी फैलाई जाती है जिससे यहां रहने वाले लोगों को न सिर्फ परेशानी होती है,बल्कि तनाव का भी माहौल बनता है। पिछले साल भी सोसायटी के लोगों ने बकरे की कुर्बानी का विरोध किया था। वैसे सोसायटी में बने नियम के मुताबिक कोई भी अपने फ्लैट में कुर्बानी नहीं दे सकता है और इस नियम को लेकर न कोई विरोध और न ही एतराज, लेकिन हिंदू पक्ष सोसयटी के कॉमन ग्राउंड में बनाए जाने वाले क़त्ल खाने को लेकर आपत्ति जता रहा है। वहीं बकरे पर जारी बवाल के बीच आईएमईआई प्रवक्ता असीम वकार ने विरोध करने वालों पर करारा पलटवार किया है। असीम वकार ने सवाल किया है कि जीव हत्या का जिन सिर्फ बकरीद पर ही क्यों निकलता है, पूरे साल यह जिन कहा छुपा रहता है। 

एआईएमआईएम प्रवक्ता असीम वकार ने कहा कि काफी समय से देखा जा रहा है कि बकरीद आते ही बहुत से गैंग सक्रिय हो जाते हैं और जीव हत्या पाप है बताने लगते है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ये साबित करना चाहते हैं कि मुसलमान क्रूर और बर्बर है। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं को बकरीद पर ही जीव हत्या और जानवरों से प्रेम क्यों याद आ जाता है। 

वसीम वकार ने कहा कि भारत में हर साल 350 करोड़ मुर्गे गोश्त के लिए काटे जाते हैं। भारत के स्लाटर हाउस से दुनिया के 35 देशों में बीफ एक्सपोर्ट किया जा रहा है। इन स्लाटर हाउस के सबसे ज्यादा ऑफिस महाराष्ट्र में हैं। बॉम्बे से बीफ का सौदा हो रहा है। हिंदुस्तान से जो बीफ एक्सपोर्ट हो रहा है वो 25 हजार करोड़ रुपये का बिजनेस है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार उसे लाइसेंस देती है। इतना ही नहीं भारत की 140 करोड़ की आबादी में 74 प्रतिशत लोग गोश्तखोर यानी नॉनवेजिटेरियन हैं। 

उन्होंने कहा कि मुसलमान सिर्फ 14 प्रतिशत है और 60 फीसदी लोग मुसलमान नहीं है। इन 60 फीसदी को समझाना चाहिए, की जीव हत्या पाप है और गोश्त नहीं खाना चाहिए। एआईएमआईएम नेता ने सवाल किया कि आखिर सारा दबाव 14 प्रतिशत पर ही क्यों 60 प्रतिशत पर क्यों नहीं है। कुल मिलाकर कुर्बानी पर जबरदस्त तनातनी है, जो फ़िलहाल थमती नजर नहीं आ रही है।  ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि क्या महजबी लड़ाई मंदिरो और मस्जिदों से होते हुए कुर्बानी तक पहुंच गई है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि त्योहारों और मजहब  वाली सियासत के चलते बलि बकरा कौन बन रहा है ?

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