महाराष्ट्र में निकाय चुनाव को लेकर घमासान, 264 नगर परिषद और नगर पंचायतों में हुआ मतदान
महाराष्ट्र में आज कड़ी सुरक्षा के बीच स्थानीय निकाय चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। इन चुनावों में 6,859 सदस्य पदों और 264 अध्यक्ष पदों के उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। कुल 264 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए मतदान हो रहा है। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक राज्य भर में 12,316 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और 62,108 मतदान कर्मियों को तैनात किया गया है।
शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। सुबह से मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ नजर आ रही है। मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कई मतदान केंद्रों पर सजावट भी की गई है और उन्हें आदर्श मतदान केंद्र का नाम दिया गया है।
संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। इसके अलावा राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन और शिकायतों से जुड़ी दिक्कतों के चलते 24 नगर परिषद और नगर पंचायतों के चुनाव टाल दिए हैं। अब 20 नवंबर को इन सभी नगर परिषद और नगर पंचायत में वोटिंग होगी।
अंबरनाथ, बारामती, अमरावती, अहिल्यानगर, नांदेड़, सोलापुर, यवतमाल, धाराशिव, चंद्रपुर, अकोला, पुणे समेत इन इलाकों में चल रही चुनाव प्रक्रिया को रोक दिया गया है। सोमवार को चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी कर बताया, मंगलवार को होने वाले चुनाव में 1 एक करोड़ सात लाख मतदाता 13,355 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
इसी बीच बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को झटका देते हुए स्पष्ट आदेश दिया है कि आज हो रहे सभी नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के परिणाम कल की बजाय 21 दिसंबर को ही घोषित किए जाएंगे। साथ ही जिन 20 से अधिक स्थानों पर आयोग ने चुनाव स्थगित कर दिए थे, जहां 20 दिसंबर को मतदान होगा और 21 दिसंबर को ही सभी जगहों के परिणाम एक साथ घोषित करने होंगे।
हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी तक हाईकोर्ट के फैसले पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य चुनाव आयोग द्वारा 288 स्थानीय निकायों में से 24 में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव स्थगित करने के फैसले की तीखी आलोचना करते हुए आयोग के स्थगित करने के फैसले को मनमाना कानूनी रूप से अस्थिर और सैकड़ों उम्मीदवारों के साथ गहरा अन्याय' करार दिया था।
उन्होंने कहा था कि उम्मीदवारों ने पूरी चुनावी तैयारी और प्रचार कर लिया था, फिर भी आयोग ने एकतरफा फैसला लिया है। सीएम ने अदालत के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। सीएम फडणवीस ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में चुनाव आयोग को सुधार लाना चाहिए। चुनाव के दौरान सभी ने नियमों का पालन किया है। कोई कोर्ट में चला गया है, इसलिए इस तरह की बातें हो रही हैं। चुनाव को लेकर पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। फडणवीस का मानना है कि सभी वोटों की गिनती टालना गलत है। उन्होंने कहा है कि ऐसे चुनाव कहीं नहीं देखे गए हैं, इसलिए चुनाव आयोग को प्रोसेस में सुधार करना चाहिए।
वहीं कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा आज नागपुर खंडपीठ द्वारा दिए गए आदेश के कारण चुनावों का पूरा खेल बिगड़ गया है। राज्य में चुनाव मजाक बनकर रह गए हैं। इसके लिए राज्य सरकार और चुनाव आयोग जिम्मेदार हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का गलत अर्थ निकाला गया है।
वहीं एनसीपी एसपी विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र लोकल बॉडी इलेक्शन में वोटों की गिनती 21 दिसंबर तक टालने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नतीजों को टालने के बारे में आज हाई कोर्ट ने जो फैसला दिया है, वो चुनाव आयोग के खराब एडमिनिस्ट्रेशन पर मुहर है।
हालांकि मुख्यमंत्री ने इस फैसले पर अपनी असहमति जताई है, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब इलेक्शन कमीशन किसी पॉलिटिकल पार्टी के पाले में होता है तो ठीक ऐसा ही होता है। आज राज्य में जो अफरा-तफरी मची है, उसके लिए इलेक्शन कमीशन के साथ-साथ बीजेपी भी उतनी ही जिम्मेदार है।
वहीं पालघर के दहानू में, दुबारा नाम वाले वोटर्स को कथित तौर पर वोट देने से रोका गया है। ये घटना दहानू म्युनिसिपल काउंसिल के वार्ड नंबर 12 में सेंट मैरी पोलिंग स्टेशन पर हुई। आरोप है कि कई वोटर्स को पोलिंग स्टेशन पर वोट नहीं डालने दिया गया क्योंकि उनका नाम दुबार यानी डबल है।
वहीं धुले के पिंपलनेर नगर परिषद चुनाव के वोटर्स, सेंटर नंबर 8, पोलिंग स्टेशन पर मशीन रुकने की वजह से लोगों को पिछले आधे घंटे से लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिसमें बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल हैं।
जबकि बुलढाणा पोलिंग बूथ पर 2 फर्जी मतदाता पकड़े गए हैं, जिन पर फर्जी वोट डालने का शक है। महाराष्ट्र कांग्रेस का दावा है कि मतदान शुरू होने के महज डेढ़ घंटे बाद ही यह घटना सामने आई है। कांग्रेस ने शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये फर्जी मतदाता उन्हीं के इशारे पर बुलढाणा मतदान केंद्र पर बुलाए गए थे।
इसके अलावा सुबह करीब 10 बजे माथेरान गिरिस्तान म्युनिसिपल काउंसिल चुनाव में शांति से वोटिंग चल रही थी, तभी एक व्यक्ति के पास से संदिग्ध हालात में पांच लाख कैश जब्त किया गया। इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया पर शक की छाया डाल दी है और इस बात पर रिएक्शन दिए जा रहे हैं कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है। बीड के मालेगांव के वार्ड नंबर 5 में पैसे बांटने के आरोप में दो ग्रुप में झड़प हो गई है। माजल गांव शहर के वार्ड नंबर 5 में कुछ समय से तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
स्थानीय निकाय चुनाव के लिए वोटिंग के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। भगुर नगर परिषद चुनाव में भाजपा की शीतल शेटे का नाम उम्मीदवारों की सूची से गायब दिखा, जिससे अधिकारियों और मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। शिल्लोड के एक मतदान केंद्र पर ढीले तार कनेक्शन के कारण एक ईवीएम मशीन ठप हो गई. पीठासीन अधिकारी ने पुष्टि की कि ढीले तारों के कारण तकनीकी खराबी आई थी, जिसे अब ठीक कर दिया गया है। इस चुनाव में महायुति बनाम महाविकास अघाड़ी के बीच कड़ी टक्कर है। ये महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव का पहला चरण है। ये मुकाबला विधानसभा चुनाव के एक वर्ष बाद फ्रेंडली फाइट, गठबंधन में तनाव और कानूनी उलझनों के बीच हो रहा है।
लगभग एक करोड़ मतदाता ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के इस मल्टी लेवल इलेक्शन के पहले फेज में मतदान कर रहे हैं। इन चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बीजेपी ने 100 सदस्यों और तीन अध्यक्ष पद पर निर्विरोध जीत हासिल की है। भले ही महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी के अगुवाई वाले महायुति और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ हैं, लेकिन निकाय चुनाव में दोस्ती और दुश्मनी की परिभाषा ही नहीं बदली, बल्कि गठबंधन का स्वरूप भी बदला हुआ नजर आ रहा है।
निकाय चुनाव में कंफ्यूजन ही कंफ्यूजन दिख रहा, कौन किसका दोस्त हैं और कौन किसका दुश्मन, कुछ समझ नहीं आ रहा है। इस चुनाव में अपना-अपना सियासी वर्चस्व कायम करने के लिए महायुति और महाविकास अघाड़ी दोनों ही बिखर गए हैं। शिवसेना के दो धड़ों में बंटने के बाद एक-दूसरे के खिलाफ जुबानी जंग कर रहे थे, अब कई जगहों पर वो साथ लड़ रहे हैं।
कांग्रेस ने कई सीट पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ हाथ मिला रखा है। ऐसे ही कई सीटों पर शिंदे ने बीजेपी के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतार रखे हैं और अजित पवार का समर्थन हासिल कर रखा है। इतना नहीं शरद पवार और अजित पवार भी कई सीट पर मिलकर बीजेपी के खिलाफ किस्मत आजमा रहे हैं। कुल मिलाकर इस तरह महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में सारे गठबंधन की पोल खुल गई है। कभी उद्धव ठाकरे के राइट हैंड माने जाने वाले एकनाथ शिंदे ने 2022 में उनका तख्तापलट कर दिया था।
शिवसेना दो धड़ों में बंट गई थी और उद्धव की सरकार गिर गई थी। एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर इसे अंजाम दिया था, लेकिन अब निकाय चुनाव में फिर से शिंदे और उद्धव खेमे ने आपस में हाथ मिलाया है। शिंदे और उद्धव की दोस्ती नहीं बल्कि कांग्रेस से गलबहियां करते नजर आ रहे है। नासिक की भगुर नगर परिषद सीट पर तो शिंदे के खिलाफ सभी दल एक साथ हैं।
तो वहीं बीजेपी, दोनों एनसीपी, शिवसेना यूबीटी कांग्रेस, एमएनएस एक हो गए हैं। ये सभी मिलकर शिंदे की शिव सेना की उम्मीदवार अनिता विजय करंजकर को मात देना चाहते हैं। बहरहाल इस चुनावी टक्कर के लिए वोटिंग जारी है और 21 दिसंबर को जब चुनावी नतीजे सामने आएंगे तो पता चलेगा कि आखिर कौन किसपर भारी पड़ा है।