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मध्य प्रदेश में कांग्रेस को झटका, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द

10 Jun, 2026 104

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्य में राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है, क्योंकि चुनाव अधिकारियों ने पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया है। भाजपा द्वारा नामांकन पर आपत्ति जताने के बाद, आवेदन की जांच में पता चला कि महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी और उसके बाद यह निर्णय लिया गया। इस घटनाक्रम से राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण बदलने की संभावना है और कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी ने उन्हें राज्यसभा की जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि, भाजपा ने आरोप लगाया कि नामांकन पत्रों के साथ जमा किए गए हलफनामे में लंबित अदालती मामले का विवरण नहीं दिया गया था। इस आपत्ति के बाद, चुनाव अधिकारियों ने दस्तावेजों की गहन जांच की। जांच के बाद, आवश्यक जानकारी छिपाने का हवाला देते हुए उनका आवेदन अमान्य घोषित कर दिया गया। इस फैसले से कांग्रेस खेमे में भारी हलचल मच गई है।

राज्य में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं और शुरुआत में कांग्रेस को एक सीट पर मजबूत स्थिति में माना जा रहा था। हालांकि, भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारकर कड़ी टक्कर पैदा कर दी। इसके बाद दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कांग्रेस के मुख्य उम्मीदवार का आवेदन खारिज होने से भाजपा को बड़ा राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है।

इस बीच, कांग्रेस ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अनुचित बताया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि यह फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया है और उन्होंने कानूनी लड़ाई का विकल्प भी खुला रखा है। दूसरी ओर, भाजपा ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा है कि सभी के लिए नियमों का समान रूप से पालन किया जाता है। भाजपा का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उम्मीदवारों को सभी जानकारी ईमानदारी से देनी चाहिए।

इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद, पूरे देश की निगाहें मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनावों पर टिक गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि मीनाक्षी नटराजन का आवेदन खारिज होने से कांग्रेस की रणनीति में बाधा आई है और भाजपा की जीत का रास्ता आसान हो गया है। संकेत मिल रहे हैं कि इस फैसले से आने वाले दिनों में राजनीतिक संघर्ष और भी तीव्र हो जाएगा और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा चुनावों में कौन सा नया राजनीतिक समीकरण बनेगा।

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