नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात आरोपियों को 8 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। इस मामले में 25 अप्रैल को अदालत ने आरोपियों को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही अदालत ने ईडी को और अधिक प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि ईडी की शिकायत में कुछ दस्तावेज गायब हैं। ईडी को पहले वे दस्तावेज जमा कराने चाहिए, उसके बाद ही समन जारी करने पर निर्णय लिया जाएगा। अदालत ने कहा था कि हम आरोपी का पक्ष सुने बिना नोटिस जारी नहीं कर सकते।
इस बीच, ईडी ने 15 अप्रैल को अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे को आरोपी बनाया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 44 और 45 के तहत शिकायत दर्ज की है।
नेशनल हेराल्ड मामला क्या है?
नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की स्थापना 1938 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी और इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा किया जाता था। 2008 में वित्तीय संकट के बाद अखबार बंद कर दिया गया और यहीं से विवाद शुरू हुआ।
इसके बाद 2010 में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। इस मामले में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में आरोप लगाया था कि वाईआईएल ने एजेएल की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सिर्फ 50 लाख रुपये में खरीदी थी और यह धोखाधड़ी और धन शोधन का मामला था।