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पीएम मोदी को गाली देने वाली लड़की को बड़ी राहत, दिल्ली पुलिस ने ले लिया है केस वापस

03 Aug, 2026 15

 

 देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में दर्ज मामला अब बंद कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आगे की कार्रवाई न करने का फैसला लेते हुए केस वापस ले लिया है। मामला कुछ महीने पहले का है जब एक युवती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। इस टिप्पणी का स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद एक व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि युवती ने सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया है जो कानून के तहत अपराध है। दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने युवती से पूछताछ की और उसके सोशल मीडिया अकाउंट को भी खंगाला। पुलिस का कहना है कि जांच में पाया गया कि युवती ने गुस्से में आकर यह टिप्पणी की थी और उसका मकसद किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था।

पुलिस ने क्यों वापस लिया केस?  
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की बारीकी से जांच की गई। जांच में सामने आया कि युवती के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही यह भी देखा गया कि उसने बाद में अपनी टिप्पणी के लिए माफी भी मांग ली थी। कानून व्यवस्था बनाए रखने और अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने के उद्देश्य से पुलिस ने मामला वापस लेने का निर्णय लिया। अधिकारी ने कहा, "हमारा उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं है। अगर कोई व्यक्ति गलती मानकर माफी मांग लेता है और आगे ऐसा न करने का आश्वासन देता है, तो हम उसे एक मौका देना उचित समझते हैं।"

कानूनी विशेषज्ञों की राय  
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानहानि के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा कहते हैं, "संविधान का अनुच्छेद 19 हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी देता है। लेकिन यह आजादी सीमित नहीं है। अगर कोई सार्वजनिक व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करता है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। लेकिन हर मामले में एफआईआर दर्ज करना और मुकदमा चलाना जरूरी नहीं है।"

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया  
जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने दिल्ली पुलिस के फैसले का स्वागत किया और कहा कि युवाओं को गलती सुधारने का मौका मिलना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। ट्विटर पर #DelhiPolice और #PMModi ट्रेंड करने लगे। एक यूजर ने लिखा, "अच्छा फैसला है। युवाओं को संवाद से समझाना चाहिए, जेल भेजकर नहीं।" दूसरे यूजर ने लिखा, "कल कोई और करेगा तो क्या उसे भी छोड़ देंगे? कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।"

क्या कहती है आईटी एक्ट की धारा?  
इस मामले में पहले सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66A का जिक्र किया जा रहा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट 2015 में ही इस धारा को असंवैधानिक घोषित कर चुका है। इसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

युवती का बयान  
नाम न जाहिर करने की शर्त पर युवती ने कहा कि उसने गुस्से में यह पोस्ट की थी। उसे नहीं पता था कि यह इतना बड़ा मुद्दा बन जाएगा। उसने कहा, "मैं प्रधानमंत्री पद का सम्मान करती हूं। मुझसे गलती हुई, मैं भविष्य में ध्यान रखूंगी।"

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