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सिप्ला पर एफडीए का बड़ा एक्शन, पुणे में दवा गोदाम का लाइसेंस रद्द

03 Oct, 2026 22

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के माल ढुलाई एवं वितरण गोदाम का लाइसेंस रद्द कर दिया है। एफडीए ने दवाओं की पैकेजिंग, भंडारण, स्टॉक प्रबंधन और दस्तावेज़ीकरण में कई कथित कमियों का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की है।

पुणे डिवीजन 3 के सहायक आयुक्त (ड्रग्स) ने बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मामले की दोबारा जांच करने के बाद 1 अक्टूबर को लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया। इससे पहले, 27 अगस्त को गोदाम के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया और संशोधित प्रक्रिया के तहत मामले पर पुनर्विचार किया गया।

एफडीए के अनुसार, पहले की कार्रवाइयों ने अनुसूची एच में सूचीबद्ध दवा रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग और विज्ञापन के बारे में सवाल उठाए थे। एफडीए ने आरोप लगाया कि दवा की पैकेजिंग पर झूठे दावे किए गए थे। इसके अलावा, गोदाम में दवाओं के भंडारण, रिकॉर्ड रखने और एक्सपायर हो चुकी दवाओं के प्रबंधन में भी कई कथित त्रुटियां पाई गईं।

बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशानुसार, एफडीए ने 4 सितंबर को सिप्ला को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी ने 11 सितंबर को अपना लिखित जवाब प्रस्तुत किया और 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई में अपना मामला दायर किया। कंपनी के जवाब, रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जांच करने के बाद, लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने लाइसेंस रद्द करने का एक नया आदेश जारी किया।एफडीए ने कहा कि यह निर्णय पुनर्परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सामने आए तथ्यों पर आधारित है और यह पिछली कार्रवाइयों की पुनरावृत्ति नहीं है। 

एफडीए की जांच में पता चला कि 'रिएक्टिन प्लस' दवा की पैकेजिंग में एक बड़ी खामी थी। एफडीए के अनुसार, पैकेजिंग पर दवा को दर्द निवारक बताया गया था और इसके कई उपयोग सूचीबद्ध थे, जिनमें सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ दर्द, जोड़ों का दर्द, मोच, शरीर में दर्द और दांत दर्द से राहत शामिल थी। एफडीए ने पैकेजिंग पर मानव आकृतियों के उपयोग और मांसपेशियों के दर्द से राहत का सुझाव देने वाली छवियों पर भी आपत्ति जताई।

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