लीलावती अस्पताल में काला जादू और घोटाले का सनसनीखेज दावा, मौजूदा ट्रस्टियों का आरोप
संवाददाता/in24 न्यूज़।
मुंबई के लीलावती अस्पताल में काला जादू और घोटाले का सनसनीखेज दावा किया गया है. मौजूदा ट्रस्टियों ने पूर्व ट्रस्टियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अस्पताल में खुदाई के दौरान मानव खोपड़ी और हड्डियों से भरे आठ कलश मिले हैं.मुंबई के मशहूर लीलावती हॉस्पिटल की जमीन में हड्डियों और बालों के कलश से काला जादू किया जा रहा है? ट्रस्टी के दावों के बाद अस्पताल परिसर में खुदाई की गई. मेटल डिटेक्टर की मदद से जांच हुई. हालांकि इन दावों में कितनी सच्चाई है, इसका पता नहीं चल सका है. जांच को लेकर रिपोर्ट आना अभी बाकी है. एक ट्रस्टी ने दूसरे ट्रस्टी पर गंभीर आरोप लगाया है. इतना ही नहीं यह मामला कोर्ट तक भी पहुंचा और मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश पर एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है. जिसके बाद अस्पताल परिसर के अंदर खुदाई हुई ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या लीलावती अस्पताल में जादू-टोना हो रहा है. मौजूदा ट्रस्टी प्रशांत मेहता ने पूर्व ट्रस्टी पर काला जादू का आरोप लगाया है. प्रशांत मेहता का दावा है कि उनके केबिन में पूर्व ट्रस्टी ने जमीन के अंदर काला जादू करने वाले समान रखे है. अब जमीन की खुदाई के फोटो और वीडियो सामने आए है.लीलावती अस्पताल के वर्तमान ट्रस्टी ने पूर्व ट्रस्टियों पर ₹1500 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया है. अस्पताल का प्रबंधन ‘लीलावती कीर्तीलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट’ के हाथों में है. ट्रस्ट का दावा है कि अस्पताल परिसर में काला जादू किया जाता था. उन्हें हड्डियों और बालों से भरे 8 कलश मिले हैं. अस्पताल के वित्तीय ऑडिट में ये बातें सामने आई हैं. न्यूज़ एजेंसी PTI की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट ने बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व ट्रस्टियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है.लीलावती कीर्तीलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट के संस्थापक किशोरी मेहता 2002 में बीमार पड़ गए थे. इलाज के लिए वे विदेश चले गए. इस दौरान उनके भाई विजय मेहता ने ट्रस्ट की बागडोर संभाली. आरोप है कि विजय मेहता ने दस्तावेजों में हेरफेर करके अपने बेटे और भतीजों को ट्रस्टी बना दिया और किशोरी मेहता को स्थायी ट्रस्टी के पद से हटा दिया. 2016 में किशोरी मेहता दोबारा ट्रस्टी बने. 8 साल तक उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली. 2024 में किशोरी मेहता की मृत्यु के बाद उनके बेटे प्रशांत मेहता स्थायी ट्रस्टी बने और उन्होंने अस्पताल के वित्तीय रिकॉर्ड का ऑडिट करवाया.