Breaking News

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सईद भारत पहुंचे, राष्ट्रपति मुर्मू और जयशंकर से करेंगे मुलाकात

03 Aug, 2026 191

 मध्य एशिया के महत्वपूर्ण देश उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सईद 2 दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे हैं। उनका यह दौरा भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रहा है। विदेश मंत्री सईद का नई दिल्ली हवाई अड्डे पर विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है जिसमें व्यापार, रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र के अधिकारी शामिल हैं।

दौरे का एजेंडा क्या है?  
विदेश मंत्रालय के अनुसार इस दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकें होंगी:  
1. राष्ट्रपति से मुलाकात: बख्तियार सईद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट करेंगे।  
2. विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता: विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हैदराबाद हाउस में विस्तृत बातचीत होगी।  
3. व्यापार समझौते: दोनों देश व्यापार को 1 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 5 बिलियन डॉलर तक ले जाने पर चर्चा करेंगे।

भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों का इतिहास  
भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध 5000 साल पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित हैं। सिल्क रूट के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार होता था। 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज़्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने "रणनीतिक साझेदारी" की घोषणा की थी। उसके बाद से रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और आईटी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है।

किन क्षेत्रों पर होगी बात?  
1. रक्षा और सुरक्षा: आतंकवाद और चरमपंथ से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करना। दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास "दोस्ती" भी करते हैं।  
2. ऊर्जा: उज्बेकिस्तान यूरेनियम और प्राकृतिक गैस से समृद्ध है। भारत उज्बेकिस्तान से ऊर्जा आयात बढ़ाना चाहता है।  
3. कनेक्टिविटी: चाबहार बंदरगाह के जरिए भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार गलियारा बनाने पर चर्चा होगी। इससे मध्य एशिया तक पहुंच आसान होगी।  
4. स्वास्थ्य: कोविड के बाद फार्मास्यूटिकल और जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में सहयोग। भारत उज्बेकिस्तान को दवाएं निर्यात करता है।  
5. शिक्षा और संस्कृति: भारतीय संस्कृति केंद्र और हिंदी भाषा को बढ़ावा देना। उज्बेक छात्र भारत में पढ़ाई के लिए आते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर सहमति  
दोनों नेता अफगानिस्तान की स्थिति, आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर भी बात करेंगे। उज्बेकिस्तान शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ का सदस्य है और भारत भी इसका सदस्य है। दोनों देश एससीओ के मंच पर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।

आर्थिक संबंध  
वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 800 मिलियन डॉलर का है। भारत उज्बेकिस्तान के फार्म, मशीनरी, कपड़ा और आईटी सेवाएं निर्यात करता है। वहीं उज्बेकिस्तान से भारत यूरेनियम, कपास और फल आयात करता है दोनों देश "इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर" को सक्रिय करने पर भी जोर दे रहे हैं। इससे भारत से रूस और यूरोप तक माल भेजना सस्ता और तेज होगा।

विशेषज्ञों की राय  
विदेश नीति विशेषज्ञ प्रोफेसर राजीव सिकरी कहते हैं, "मध्य एशिया भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उज्बेकिस्तान इस क्षेत्र का दिल है। इस दौरे से भारत को अफगानिस्तान के बाद मध्य एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी।"  एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि चीन और पाकिस्तान की मौजूदगी को देखते हुए भारत के लिए उज्बेकिस्तान के साथ रिश्ते गहरे करना जरूरी है। उज्बेकिस्तान जमीन से घिरा देश है। उसे समुद्र तक पहुंचने के लिए भारत जैसे देशों की जरूरत है। भारत उसकी तकनीक, दवाएं और प्रशिक्षण दे सकता है। वहीं भारत को उज्बेकिस्तान से ऊर्जा और खनिज चाहिए।

अन्य खबरे