सीबीआई ने 158 भर्ती और प्रवेश परीक्षा घोटाला केस में फास्ट ट्रैक सुनवाई की मांग की, कहा युवाओं का भविष्य दांव पर
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने देश भर में लंबित 158 भर्ती और प्रवेश परीक्षा घोटाला मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है। सीबीआई का कहना है कि इन मामलों में देरी से लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। सीबीआई ने यह मांग सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के जरिए की है। एजेंसी ने कहा कि पेपर लीक, फर्जी नियुक्ति और प्रवेश परीक्षा में धांधली जैसे मामले शिक्षा और रोजगार व्यवस्था की जड़ें खोखली कर रहे हैं।
क्या हैं ये 158 मामले?
सीबीआई के अनुसार ये 158 मामले पिछले 10 सालों में दर्ज किए गए हैं। इनमें नीट, जेईई, एसएससी, बैंकिंग और राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियां शामिल हैं। कई मामलों में प्रश्न पत्र लीक हुए, तो कई में फर्जी अभ्यर्थियों को पास कराया गया। उदाहरण के तौर पर बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती और पुलिस भर्ती घोटाले सबसे बड़े हैं। इन घोटालों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ और हजारों योग्य उम्मीदवार अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे।
सीबीआई ने फास्ट ट्रैक कोर्ट क्यों मांगा?
1. पीड़ित युवा इंतजार कर रहे हैं: कई अभ्यर्थी 5-7 साल से रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
2. सबूत नष्ट होने का डर: समय बीतने के साथ गवाह मुकर जाते हैं और डिजिटल सबूत डिलीट हो जाते हैं।
3. जनता का भरोसा: अगर ऐसे मामलों में जल्द सजा नहीं हुई तो लोगों का परीक्षा सिस्टम से भरोसा उठ जाएगा।
सरकार और कोर्ट का रुख
केंद्र सरकार ने सीबीआई की मांग का समर्थन किया है। सरकार का कहना है कि शिक्षा में पारदर्शिता के लिए ऐसे मामलों का जल्द निपटारा जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है।
पहले भी हुए हैं फास्ट ट्रैक ट्रायल
भारत में पहले भी निर्भया केस और मुंबई हमले जैसे मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर जल्द सुनवाई की गई थी। सीबीआई चाहती है कि भर्ती घोटालों को भी उसी तर्ज पर देखा जाए।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञ प्रोफेसर अनिल सदगोपाल कहते हैं, "पेपर लीक माफिया एक संगठित गिरोह की तरह काम करता है। जब तक इनको कड़ी सजा नहीं मिलेगी, ये रुकेंगे नहीं।"
एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि सिर्फ कोर्ट तेज करने से काम नहीं चलेगा, परीक्षा एजेंसियों की सुरक्षा भी बढ़ानी होगी सोशल मीडिया पर #FastTrackJustice ट्रेंड कर रहा है। एक अभ्यर्थी ने लिखा, "3 साल से एसएससी का रिजल्ट नहीं आया। कब मिलेगा न्याय?"