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नासिक में स्कूलों के पास जंक फूड पर बैन बच्चों की सेहत को लेकर बड़ा फैसला!

02 Aug, 2026 60

बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन ने नासिक में बड़ा अभियान शुरू किया है। अब शहर के स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में चिप्स, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक और अन्य जंक फूड बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। खाद्य और औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इसकी एक बड़ी वजह स्कूलों के आसपास आसानी से मिलने वाला जंक फूड है। बच्चे टिफिन की जगह बाहर से चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और तले हुए स्नैक्स खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

खाद्य और औषधि प्रशासन का ये अभियान मई 2025 के आखिरी हफ्ते में पूरे महाराष्ट्र में चलाया गया था। नासिक डिवीजन में ये कार्रवाई जेल रोड, नाशिक रोड, पंचवटी, त्र्यंबकेश्वर, इगतपुरी, सिन्नर और मुंबई-नासिक हाईवे जैसे इलाकों में की गई। जांच के दौरान खाद्य और औषधि प्रशासन की टीम को कई दुकानों में बिना लाइसेंस के खाने-पीने की चीजें बेचते हुए पाया गया। कुछ जगहों पर गुटखा, सुगंधित तंबाकू और एनर्जी ड्रिंक भी खुले में बेचे जा रहे थे। कई दुकानों में साफ-सफाई का भी अभाव था। खाद्य और औषधि प्रशासन के संयुक्त आयुक्त डी.जे. तंबोली ने कहा, "गर्मी के कारण एनर्जी ड्रिंक की मांग बढ़ गई है। हम लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले। जो भी नियम तोड़ेगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।"

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण और महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन के नए नियमों के अनुसार अब स्कूलों के 50 से 500 मीटर के दायरे में ये चीजें नहीं बेची जाएंगी साथ ही बच्चों को लक्षित करने वाले विज्ञापन और प्रमोशन पर भी रोक लगाई गई है। स्कूलों के पास पोस्टर, बैनर या होर्डिंग्स के जरिए जंक फूड का प्रचार नहीं किया जा सकेगा।

मालेगांव में 17.27 लाख रुपये का मिलावटी सोयाबीन तेल जब्त किया गया। जांच में पाया गया कि तेल में मिलावट की गई थी। ओल्ड नासिक में 1.01 लाख का प्रतिबंधित सामान पकड़ा गया और दुकान को सील कर एफआईआर दर्ज की गई। चांदवड में भी ढीला बेचा जा रहा सोयाबीन तेल जब्त किया गया। इगतपुरी, देओल, पंचवटी और मुंबई नाका से बड़ी मात्रा में राज्य में प्रतिबंधित गुटखा और सुगंधित तंबाकू भी पकड़ा गया पूरे महाराष्ट्र में इस अभियान में 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 27 प्रतिष्ठानों को सील किया गया। लगभग 50 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जंक फूड खाने से बच्चों में मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं।

स्कूल के बाहर सस्ते दाम पर मिलने वाले चिप्स और कोल्ड ड्रिंक बच्चों की पहली पसंद बन गए हैं। खाद्य और औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. पल्लवी दराडे ने कहा था कि बच्चों को फल, सब्जी, दूध और अनाज खाना चाहिए, लेकिन कंपनियां सस्ते और आकर्षक विज्ञापनों से जंक फूड बेच रही हैं। इसी को रोकने के लिए 'ईटिंग राइट' योजना शुरू की गई है। इस योजना का मकसद स्कूलों में सही खानपान की आदत डालना है। खाद्य और औषधि मंत्री नरहरि जिरवा ने भी कहा कि स्कूलों के पास हानिकारक सामान बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। अभिभावकों, शिक्षकों और प्रिंसिपलों से अपील की गई है कि वे उल्लंघन की शिकायत खाद्य और औषधि प्रशासन को करें।

खाद्य और औषधि प्रशासन अगले 8-10 दिन में स्कूलों के लिए नए फूड स्टैंडर्ड जारी करेगा। इसमें खाने की गुणवत्ता, पोषण और संतुलित आहार के नियम होंगे। हर स्कूल को शिक्षकों, पोषण विशेषज्ञों, अभिभावकों और छात्रों की एक हेल्थ कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी ये तय करेगी कि कैंटीन में क्या बेचा जाए और क्या नहीं। असिस्टेंट कमिश्नर स्कूलों में जाकर शिक्षकों को ट्रेनिंग भी देंगे। उन्हें बताया जाएगा कि कौन सा खाना देना है और कौन सा नहीं। स्कूलों में हेल्दी फूड कॉर्नर बनाने के लिए भी कहा जाएगा।

इस फैसले से छोटे दुकानदार और एफएमसीजी कंपनियां नाराज हैं। सीएआईटी यानी कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने सरकार से इस नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे कारोबार प्रभावित होगा और बच्चों की पसंद पर रोक लगाना सही नहीं है। लेकिन खाद्य और औषधि प्रशासन का साफ कहना है कि बच्चों की सेहत से कोई समझौता नहीं होगा। प्रशासन ने कहा कि व्यापार करना जरूरी है, लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं।

खाद्य और औषधि प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि अगर कहीं मिलावट या नियमों का उल्लंघन दिखे तो तुरंत टोल-फ्री नंबर 1800-222-365 पर शिकायत करें। आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। गोपनीय सूचना देने वालों का नाम गुप्त रखा जाएगा। विभाग लगातार मिलावट और घटिया खाद्य पदार्थों की बिक्री की जानकारी जुटा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ बैन से काम नहीं चलेगा। अभिभावकों को भी बच्चों को घर से हेल्दी टिफिन देकर भेजना होगा। स्कूलों को कैंटीन में फल, दूध, जूस और हेल्दी स्नैक्स रखना होगा। पोषण विशेषज्ञ कहते हैं कि 10-15 साल की उम्र में गलत खानपान की आदत जीवनभर बीमारी देती है। इसलिए अभी से बच्चों को जागरूक करना जरूरी है।

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