जामिया हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को होगी सुनवाई
संवाददाता/in24 न्यूज़।
नागरिकता संशोधन कानून पर जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह की याचिका पर शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले की कल सुनवाई करेगी लेकिन उससे पहले हिंसा रुकनी चाहिए।जयसिंह ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे के सामने दलील रखी कि पूरे देश में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं और अधिकारों के संरक्षण के लिए अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा, 'हम इस मामले पर सुनवाई मंगलवार करेंगे, लेकिन पहले हिंसा रुकनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि छात्र हैं, इसलिए उन्हें हिंसा करने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम पुलिस कर रही है। इसमें कोर्ट ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। पहले शांति बहाल होने दें। अगर हिंसा जारी रहती है तो तो वे इसे कल सुन लेंगे।चीफ जस्टिस की बेंच के सामने याचिकाकर्ता ने पुलिस द्वारा हिंसा का कथित विडियो होने की भी बात कही। इसके जवाब में चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि यह कोर्ट रूम है, यहां शांति से अपनी बात रखनी होगी।दिल्ली हाई कोर्ट में भी एक जनहित याचिका तत्काल सुनवाई के लिए दाखिल की गई। दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया में हिंसा और 52 छात्रों को हिरासत में लिए जाने पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले रजिस्ट्री कराएं और उसके बाद अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करते हुए यहां पहुंचे। चीफ जस्टिस ने दिल्ली पुलिस द्वारा हिंसा किए जाने के तर्क पर कहा कि यह कानून-प्रशासन का मामला है, ऐसे हालात में पुलिस को कदम उठाना ही होगा। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। विरोध के लिए छात्र अपने हाथ में कानून नहीं ले सकते।' इसके बाद चीफ जस्टिस ने मामले की सुनवाई के लिए मंगलवार का दिन तय किया है।