अयोध्या, 22 जुलाई 2026 श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज अयोध्या की मणिराम दास छावनी में बेहद महत्वपूर्ण बैठक हो रही है। राम मंदिर में दान चोरी के खुलासे के बाद ट्रस्ट की यह पहली बड़ी बैठक है, जिसमें कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए जाने की उम्मीद है। ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे और एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट के बाद यह बैठक और भी अहम हो गई है। आज की बैठक में नए महासचिव की औपचारिक नियुक्ति, ट्रस्ट में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ के पद का सृजन और विभिन्न समितियों के पुनर्गठन पर अंतिम मुहर लग सकती है।
 
बैठक का एजेंडा: 3 बड़े मुद्दे
 नए महासचिव: बजरंग बागड़ा संभालेंगे कमान
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने 25 जून 2026 को एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। दोनों पदाधिकारी अयोध्या में रहकर मंदिर की मुख्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं देखते थे। उनके इस्तीफे के बाद ट्रस्ट में नेतृत्व का संकट पैदा हो गया था।

6 जुलाई 2026 को हुई बैठक में ट्रस्ट ने चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही सर्वसम्मति से विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा को ट्रस्ट का नया महासचिव नियुक्त किया गया। बागड़ा पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और नाल्को जैसी सरकारी कंपनी के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। आज की बैठक में बागड़ा के नाम पर औपचारिक मुहर लगने के साथ ही उन्हें कार्यभार सौंपा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार बागड़ा फिलहाल अयोध्या में ही मौजूद हैं और जल्द ही मंदिर परिसर की कमान संभालेंगे।
 
 पहली बार नियुक्त होगा सीईओ, नृपेंद्र मिश्रा का नाम सबसे आगे
प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। सीईओ मंदिर परिसर के दैनिक संचालन, वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी संभालेगा। सीईओ के चयन के लिए ट्रस्ट ने एक 3 सदस्यीय समिति भी गठित की है। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हावरे शामिल हैं। ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए आवेदन भी मांगे हैं।

सीईओ के लिए योग्यता:
1.  उम्मीदवार का स्नातक होना अनिवार्य है
2.  प्रशासन या वित्त के क्षेत्र में न्यूनतम 20 वर्ष का अनुभव
3.  उम्मीदवार का हिंदू धर्म का अनुयायी होना जरूरी

सूत्रों का दावा है कि प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे नृपेंद्र मिश्रा को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए ट्रस्ट मंदिर की पूरी वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था उन्हें सौंपना चाहता है।
 
  समितियों का पुनर्गठन और एसआईटी रिपोर्ट पर मंथन
बैठक में ट्रस्ट की मौजूदा सभी समितियों को भंग कर उनका नए सिरे से गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य कामकाज को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा होगी। दान चोरी मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया है।
 
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने जानकारी दी कि प्राण प्रतिष्ठा तक ट्रस्ट को कुल लगभग 3200 करोड़ रुपये का समर्पण प्राप्त हुआ था। अभी ट्रस्ट के पास करीब 1800 करोड़ रुपये शेष हैं। इस राशि से मंदिर का परकोटा, सुरक्षा दीवार, कार्यालय और अतिथि गृह का निर्माण किया जाएगा।
अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा, "हमारा उद्देश्य दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाना है। साथ ही प्रबंधन में जो भी कमियां हैं उन्हें दूर किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में कोई कमी नहीं आई है और मंदिर के शेष विकास कार्य लगातार जारी रहेंगे।"
 
पिछले महीने राम मंदिर के दान पात्र से चोरी और गबन का मामला सामने आया था। इसके बाद प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगे। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत भी लंबे समय से खराब है और वे बोलने में असमर्थ हैं। ट्रस्टी राजा विमलेंद्र मोहन मिश्रा का भी निधन हो चुका है। इन सब कारणों से ट्रस्ट में नेतृत्व और प्रशासनिक शून्यता की स्थिति बन गई थी, जिसे दूर करने के लिए सरकार और ट्रस्ट ने बड़े बदलाव का फैसला किया है।