यूपी एटीएस का दावा बलरामपुर का युवक बना रहा था आईएसआई से जुड़ा आतंकी नेटवर्क, मुंबई में हमले की थी साजिश
22 Jul, 2026
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लखनऊ, 22 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते ने मंगलवार को एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। दस्ते के मुताबिक बलरामपुर जिले का एक युवक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में रहकर मुंबई में हमले की साजिश रच रहा था। दस्ते की टीम ने बलरामपुर और आसपास के इलाकों में छापेमारी कर मोबाइल, लैपटॉप समेत कई उपकरण जब्त किए हैं और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते ने मंगलवार को एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। दस्ते के मुताबिक बलरामपुर जिले का एक युवक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में रहकर मुंबई में हमले की साजिश रच रहा था। दस्ते की टीम ने बलरामपुर और आसपास के इलाकों में छापेमारी कर मोबाइल, लैपटॉप समेत कई उपकरण जब्त किए हैं और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।
दस्ते को कैसे मिली जानकारी?
सूत्रों के अनुसार दस्ते को खुफिया सूचना मिली थी कि सोशल मीडिया और गुप्त संदेश भेजने वाले ऐप के जरिए कुछ युवाओं को कट्टरपंथ सामग्री भेजी जा रही है और उन्हें आतंकी गुट में शामिल किया जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर दस्ते ने बलरामपुर में एक युवक को हिरासत में लिया। पूछताछ में युवक ने आईएसआई के संचालकों के संपर्क में होने और मुंबई में हमले की योजना बनाने की बात स्वीकार की।
सूत्रों के अनुसार दस्ते को खुफिया सूचना मिली थी कि सोशल मीडिया और गुप्त संदेश भेजने वाले ऐप के जरिए कुछ युवाओं को कट्टरपंथ सामग्री भेजी जा रही है और उन्हें आतंकी गुट में शामिल किया जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर दस्ते ने बलरामपुर में एक युवक को हिरासत में लिया। पूछताछ में युवक ने आईएसआई के संचालकों के संपर्क में होने और मुंबई में हमले की योजना बनाने की बात स्वीकार की।
क्या थी साजिश?
दस्ते के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी युवक आईएसआई के संचालक यावर खान और मुन्ना झिंगाड़ा के संपर्क में था। ये दोनों पाकिस्तान में बैठकर भारत में आतंकी गतिविधियां चला रहे हैं। जांच में सामने आया कि गुट का मकसद मुंबई जैसे बड़े शहरों में सुरक्षा ठिकानों और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाना था। आरोपी को तार और व्हाट्सएप समूह के जरिए 'इस्लामिक राजनीति' जैसे चैनलों से जोड़ा गया था, जहां सरकार विरोधी और राष्ट्रविरोधी सामग्री साझा की जाती थी। दस्ते ने आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए हैं। तकनीकी जांच में यह पता लगाया जाएगा कि नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
दस्ते के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी युवक आईएसआई के संचालक यावर खान और मुन्ना झिंगाड़ा के संपर्क में था। ये दोनों पाकिस्तान में बैठकर भारत में आतंकी गतिविधियां चला रहे हैं। जांच में सामने आया कि गुट का मकसद मुंबई जैसे बड़े शहरों में सुरक्षा ठिकानों और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाना था। आरोपी को तार और व्हाट्सएप समूह के जरिए 'इस्लामिक राजनीति' जैसे चैनलों से जोड़ा गया था, जहां सरकार विरोधी और राष्ट्रविरोधी सामग्री साझा की जाती थी। दस्ते ने आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए हैं। तकनीकी जांच में यह पता लगाया जाएगा कि नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
देशभर में बढ़ी सतर्कता
इस खुलासे के बाद मुंबई, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। महाराष्ट्र दस्ते ने भी मुंबई के कुर्ला और गोवंडी में छापेमारी कर 3 ठिकानों की तलाशी ली थी। दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई ने पिछले महीने आईएसआई और मुंबई अपराध जगत से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला था कि इस गुट के निशाने पर दिल्ली, मुंबई समेत 5 शहर थे। संचालक पाकिस्तान से मुन्ना झिंगाड़ा और यावर खान नेटवर्क चला रहे थे।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
यूपी दस्ता पहले भी आईएसआई के लिए जासूसी करने वालों को गिरफ्तार कर चुका है। गोंडा के रईस और सलमान को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि वे आईएसआई संचालकों को देश की गोपनीय जानकारी भेज रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन गिरोह युवाओं को 21 हजार रुपये तक का लालच देकर इस जाल में फंसाते हैं। बाद में उनसे सुरक्षा ठिकानों की जानकारी और हमले कराए जाते हैं। दस्ते के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम इस पूरे नेटवर्क की कड़ी से कड़ी जोड़ रहे हैं। आरोपी से पूछताछ जारी है। किसके-किसके संपर्क में था, पैसा कहां से आ रहा था, इसकी जांच की जा रही है। किसी भी साजिश को अंजाम तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा"।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
यूपी दस्ता पहले भी आईएसआई के लिए जासूसी करने वालों को गिरफ्तार कर चुका है। गोंडा के रईस और सलमान को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि वे आईएसआई संचालकों को देश की गोपनीय जानकारी भेज रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन गिरोह युवाओं को 21 हजार रुपये तक का लालच देकर इस जाल में फंसाते हैं। बाद में उनसे सुरक्षा ठिकानों की जानकारी और हमले कराए जाते हैं। दस्ते के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम इस पूरे नेटवर्क की कड़ी से कड़ी जोड़ रहे हैं। आरोपी से पूछताछ जारी है। किसके-किसके संपर्क में था, पैसा कहां से आ रहा था, इसकी जांच की जा रही है। किसी भी साजिश को अंजाम तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा"।