राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू, मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने दिलाई शपथ
संवाददाता/in24 न्यूज़.
देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के लिए आज द्रौपदी मुर्मू ने शपथ ली. इसी के साथ वह भारत की 15वीं राष्ट्रपति बन गईं. वह देश की दूसरी महिला और पहली आदिवासी हैं जो भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच पाई हैं. सोमवार को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित किए गए शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमण ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. इसी के साथ द्रौपदी मुर्मू देश की सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति भी बन गई हैं. वह आजादी के बाद जन्म लेने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति हैं. शपथ ग्रहण से पहले द्रौपदी मुर्मू ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की. राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सभी भारतीयों की अपेक्षाओं आकांक्षाओं और अधिकारों के प्रतीक, संसद में खड़े होकर मैं आप सभी का नम्रतापूर्वक आभार व्यक्त करती हूं. इस नई जिम्मेदारी को निभाने के लिए आपका विश्वास और समर्थन मेरे लिए एक बड़ी ताकत होगी.राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि, मैं ओडिशा के जिस गांव में पैदा हुई वहां स्कूल जाना एक सपना था. मैंने अपने गांव से कॉलेज जाने वाली पहली लड़की थी. भारत के राष्ट्रपति पद पर मेरा निर्वाचन मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है. यह देश के हर गरीब की उपलब्धि है. देश का हर गरीब व्यक्ति मुझमें अपना प्रतिबिंब देख सकता है. राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मैं देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूं जिसका जन्म आज़ाद भारत में हुआ है. उन्होंने कहा कि संथाल क्रांति, पाइका क्रांति से लेकर कोल क्रांति और भील क्रांति ने स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी योगदान को और सशक्त किया था. सामाजिक उत्थान एवं देश-प्रेम के लिए ‘धरती आबा’ भगवान् बिरसा मुंडा जी के बलिदान से हमें प्रेरणा मिली थी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि दशकों पहले मुझे रायरंगपुर में श्री ऑरोबिंदो इंटीग्रल स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था. कुछ ही दिनों बाद श्री ऑरोबिंदो की 150वीं जन्म जयंती मनाई जाएगी. शिक्षा के बारे में श्री ऑरोबिंदो के विचारों ने मुझे निरंतर प्रेरित किया है. उन्होंने कहा कि एक संसदीय लोकतंत्र के रूप में 75 वर्षों में भारत ने प्रगति के संकल्प को सहभागिता एवं सर्व-सम्मति से आगे बढ़ाया है. विविधताओं से भरे अपने देश में हम अनेक भाषा, धर्म, संप्रदाय, खान-पान, रहन-सहन, रीति-रिवाजों को अपनाते हुए ‘एक भारत– श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण में सक्रिय हैं. बता दें कि नए राष्ट्रपति ने अपने संबोधन से उनका मुंह बंद कर दिया है, जो उनका विरोध करते हुए कहते थे कि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने भाषण नहीं दिया और ना प्रेस कॉन्फ्रेंस की.