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भाषा विवाद के बीच बोले गृह मंत्री - देश में अंग्रेजी बोलने वालों को अपने ऊपर आएगी शर्म'

19 Jun, 2025 135

गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि अब वह समय दूर नहीं जब अंग्रेज़ी बोलने वालों को खुद पर शर्म महसूस होगी। दरअसल गृह मंत्री अमित शाह पूर्व आईएएस अधिकारी अशुतोष अग्निहोत्री की पुस्तक ‘मैं बूंद स्वयं, खुद सागर हूं’ के विमोचन समारोह में पहुंचे थे जहा शाह ने कहा कि भारतीय भाषाएं न केवल हमारी पहचान हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा भी हैं, और अब वक्त है कि हम इन्हें गर्व से अपनाएं।

"भारतीय भाषाएं हमारी असली पहचान हैं"
अमित शाह ने कहा, “एक ऐसा समाज तैयार हो रहा है, जिसमें अंग्रेज़ी बोलना गर्व का नहीं, बल्कि शर्म का विषय बन जाएगा।" उन्होंने विश्वास जताया कि परिवर्तन संभव है, बशर्ते लोग दृढ़ निश्चय लें। “हमारी भाषाएं हमारी संस्कृति के रत्न हैं। इनके बिना भारत को पूरी तरह समझना असंभव है।”उन्होंने तर्क दिया कि भारत के इतिहास, धर्म और संस्कृति को समझने के लिए विदेशी भाषाएं नाकाफी हैं। “हम अधूरी विदेशी भाषाओं से एक पूर्ण भारत को नहीं समझ सकते। लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि यह लड़ाई हम जीतेंगे और आत्मसम्मान के साथ अपनी भाषाओं में शासन करेंगे,” उन्होंने कहा।

शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘पंच प्रण’ (पांच संकल्प) का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारत के अमृतकाल का मार्गदर्शन करेंगे। "विकसित भारत, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व, अखंडता के प्रति निष्ठा और कर्तव्यबोध—इन सबमें हमारी भाषाएं प्रमुख भूमिका निभाएंगी," उन्होंने कहा। पुस्तक के लेखक अशुतोष अग्निहोत्री की चर्चा करते हुए शाह ने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की मांग की। “आज की ट्रेनिंग व्यवस्था में सहानुभूति की कमी है, जो औपनिवेशिक सोच का परिणाम है। एक प्रशासक बिना सहानुभूति के जनसेवा नहीं कर सकता।”

"साहित्य ने हमेशा संस्कृति को जीवित रखा"
शाह ने भारतीय साहित्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि अंधकार के युग में भी साहित्य ने धर्म, स्वतंत्रता और संस्कृति की लौ को जीवित रखा। “सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन जब भी संस्कृति और साहित्य पर संकट आया, समाज ने उसका डटकर विरोध किया। साहित्य समाज की आत्मा है।”

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