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चुनाव आयोग के कामकाज को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक से किया इनकार

05 Oct, 2026 19

सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से निलंबित करने या अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा निर्णय लेने के आरोपों पर उनके निर्णयों पर रोक लगाने के लिए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। हालांकि, न्यायालय ने भारतीय चुनाव आयोग को विवादित निर्णयों से संबंधित सभी दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

पटना निवासी राकेश कुमार सिंह ने यह याचिका दायर की है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना ही चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में कई दिशा-निर्देश और बदलाव किए गए।

याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उन्होंने संवैधानिक और वैधानिक ढांचे के विरुद्ध कार्य किया है। याचिका की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह जांच करना आवश्यक है कि संबंधित निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्वयं लिए थे या उन्हें सर्वसम्मति से या चुनाव आयोग द्वारा बहुमत से अनुमोदित किया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान फॉर्म 6 में हुए बदलावों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अदालत यह देखना चाहती है कि संबंधित रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद फॉर्म 6 में वास्तव में किसने बदलाव किए। मुख्य न्यायाधीश ने आगे स्पष्ट किया कि यदि किसी निर्णय पर आम सहमति नहीं बनती है, तो यह अपेक्षित है कि निर्णय बहुमत से लिया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो निर्णय रद्द किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने अपने तर्क केवल समाचार पत्रों की रिपोर्टों पर आधारित किए हैं।

फॉर्म 6 एक आवेदन पत्र है जिसका उपयोग पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम नए मतदाता के रूप में दर्ज कराने के लिए करते हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि इस मामले में चुनाव आयोग द्वारा जारी बयान ही प्रासंगिक है और आयोग ने संबंधित समाचार का खंडन नहीं किया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि संबंधित समाचार सही या गलत हो सकता है; लेकिन न्यायालय केवल उस समाचार के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि न्यायालय को चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार करना होगा।

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि इस मामले का दायरा बेहद गंभीर है। उन्होंने दावा किया कि इससे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों के मतदान अधिकारों पर असर पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त नामक संस्था के राष्ट्रीय स्तर के कामकाज से जुड़ा है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में कोई भी गैरकानूनी गतिविधि पाई जाती है, तो निश्चित रूप से इसके परिणाम भुगतने होंगे। इस बीच, याचिकाकर्ताओं के वकील विकास सिंह ने मांग की कि चुनाव आयोग को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा देश में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि न्यायालय को चुनाव प्रक्रिया या नियुक्ति प्रक्रिया में कोई खामी पाई जाती है, तो उसके पास संबंधित परिणामों को रद्द करने का विकल्प है। हालांकि, वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले कभी भी किसी चुनाव को रद्द या खारिज नहीं किया है। इसलिए, न्यायालय को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने चाहिए कि चुनाव आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएं।

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