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राजीव गांधी के मना करने पर भी संजय गांधी ने प्लेन उड़ाया : राहुल गांधी

03 Sep, 2021 746

संवाददाता/in24 न्यूज़
कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी अपने पिता राजीव गांधी की तरह प्‍लेन उड़ाने का शौक रखते हैं। प‍िता राजीव गांधी को याद करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि उनका मानना है कि पायलट होने से सार्वजनिक जीवन में भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है और बड़े स्तर पर चीजों को देखने का नजरिया विकसित होता है। कांग्रेस के सोशल मीडिया अकाउंट पर गुरुवार को शेयर क‍िए गए वीडियो में राहुल गांधी ने बताया क‍ि जिस दिन राजीव के भाई संजय गांधी का विमान दुर्घटना में निधन हुआ था, उस दिन राजीव ने उन्हें विमान उड़ाने से मना किया था। हाल में भारतीय युवा कांग्रेस की ओर से आयोजित राजीव गांधी फोटो प्रदर्शनी में बनाए गए पांच मिनट से अधिक के वीडियो में राहुल गांधी ने अपने पिता के साथ प्‍लेन में बिताए गए समय को याद किया। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता के साथ अल सुबह प्‍लेन में निकल पड़ते थे और दोनों को ही प्‍लेन उड़ाना पसंद था। वीडियो में राहुल ने अपने चाचा संजय गांधी की प्‍लेन दुर्घटना में हुई मौत को भी याद किया और कहा कि जिस दिन वह भीषण दुर्घटना हुई उस दिन राजीव ने अपने छोटे भाई को विमान उड़ाने से मना किया था। राहुल ने वीडियो में कहा कि मेरे चाचा एक विशेष प्रकार का प्‍लेन उड़ा रहे थे- वह पिट्स था। वह बेहद तेज प्‍लेन था। मेरे पिता ने उनसे कहा कि ऐसा मत करो। मेरे चाचा के पास उतना अनुभव नहीं था। मेरे चाचा के पास तीन से साढ़े तीन सौ घंटे प्‍लेन उड़ाने का अनुभव था, वही जितना मुझे है। और उन्हें वह प्‍लेन नहीं उड़ाना चाहिए था लेक‍िन उन्होंने उड़ाया। और वही हुआ जो उड़ाने का अनुभव न होने पर होता है। आसानी से खुद की जान ली जा सकती है। रिपोर्ट्स  के मुताबिक राहुल ने अपने पिता के फ्लाइट उड़ाने के प्यार और अपनी मां सोनिया गांधी की लगातार चिंता के बारे में राजीव गांधी पर एक फोटो प्रदर्शनी को लेकर रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में बात की है। बता दें कि नई दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे के पास 23 जून 1980 को संजय गांधी का विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। एक पायलट किस प्रकार खुद को एक नेता के रूप में ट्रेंड करता है, इस पर राहुल गांधी ने कहा कि पायलटों में एक विशेष प्रकार का गुण होता है जो उन्हें ट्रेन‍िंग से प्राप्त होता है और वह यह है कि उसे 30 हजार फीट की ऊंचाई से दिखने वाले दृश्य से अपनी नजर को कॉकपिट के भीतर के दृश्य लाना होता है।

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