विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए प्रस्ताव किया पेश, प्रस्ताव पर 10 घंटे चलेगी चर्चा
मंगलवार को लोकसभा में उस समय भारी राजनीतिक हंगामा मच गया जब राष्ट्रीय कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पेश होते ही सदन में प्रक्रिया और नियमों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। अंततः सदन ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी, जिसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से प्रस्ताव पेश किया। बताया जा रहा है कि 118 विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष ने पक्षपातपूर्ण रुख अपनाया है। विपक्ष के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।
प्रस्ताव पेश होने के बाद एक और विवाद खड़ा हो गया। सवाल यह उठा कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान सदन की अध्यक्षता कौन करेगा। उस समय सदन की अध्यक्षता जगदंबिका पाल कर रही थीं। असदुद्दीन ओवैसी और सौगत रॉय ने इस मुद्दे पर व्यवस्था का प्रश्न उठाया। ओवैसी ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब अध्यक्ष या उनके नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं करनी चाहिए। ओवैसी ने यह भी बताया कि लोकसभा में अभी तक उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। इसलिए, अध्यक्ष की स्वीकृति से ही अध्यक्ष पद पर बैठे सदस्य की नियुक्ति हुई है और उनके लिए प्रस्ताव पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि चर्चा शुरू करने से पहले सदन को यह तय कर लेना चाहिए कि अध्यक्षता कौन करेगा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार, अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा कोई भी सदस्य अध्यक्ष के अधिकार का प्रयोग कर सदन का संचालन कर सकता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी दुबे के इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि नियम स्पष्ट रूप से अध्यक्ष को यह अधिकार देते हैं।
इसी बीच, कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अभी तक उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है, जो एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने मांग की कि सदन को चर्चा शुरू करने से पहले यह तय करना होगा कि अध्यक्षता कौन करेगा। भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे सदस्य को सदन की कार्यवाही संचालित करने का पूरा अधिकार है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सदन की अध्यक्षता कर रही जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि लोकसभा अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं है, इसलिए अध्यक्ष को कार्यवाही संचालित करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वयं इस चर्चा के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का निर्णय लिया था। इसके बाद कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने सदन में लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश किया। अंततः लोकसभा में इस प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे चर्चा करने का निर्णय लिया गया।