किसान आंदोलन के 18वें दिन और उग्र हुआ आंदोलन
संवाददाता/in24न्यूज़.
किसान आंदोलन दिन ब दिन अपना रफ़्तार बढ़ाता जा रहा है. बता दें कि कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलन का आज 18वां दिन है। कृषि कानूनों को लेकर किसानों के तेवर और सख्त हो गए हैं। किसान आंदोलन और तेज करने और जयपुर-दिल्ली एवं दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस-वे को अवरुद्ध करने की किसानों ने घोषणा की है। इसके साथ ही आज रविवार को हजारों किसान राजस्थान के शाहजहांपुर से जयपुर-दिल्ली राजमार्ग के रास्ते सुबह 11 बजे अपने ट्रैक्टरों से दिल्ली चलो मार्च शुरू है. जयपुर से किसानों के कूच की खबर से हरियाणा पुलिस सतर्क है। रेवाड़ी के एसपी अभिषेक जोरवाल ने कहा कि हरियाणा पुलिस राजस्थान पुलिस से लगातार कोआर्डिनेशन बनाकर रखी हुई है। जैसे ही किसान राजस्थान से निकलेंगे उन्हें सूचना मिलेगी। किसान नेता कमलप्रीत पन्नू ने कहा कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले, हमें संशोधन मंजूर नहीं है। हम सरकार से बातचीत से इनकार नहीं करते हैं। कमलप्रीत पन्नू ने आगे कहा कि हमारे गांव से लोग चल पड़े हैं। लोग आ न सकें इसके लिए बैरिकेड लगाए गए, वो भी तोड़ दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी हमारा धरना दिल्ली के 4 प्वाइंट पर चल रहा है। सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेता कंवलप्रीत सिंह पन्नू ने कहा कि रविवार को हजारों किसान राजस्थान के शाहजहांपुर से जयपुर-दिल्ली राजमार्ग के रास्ते सुबह 11 बजे अपने ट्रैक्टरों से दिल्ली चलो मार्च शुरू करेंगे। साथ ही किसानों ने घोषणा की कि उनकी यूनियनों के प्रतिनिधि 14 दिसंबर को देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठेंगे। किसानों के दिल्ली चलो आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने शनिवार को शहर की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। जिनमें बहुस्तरीय अवरोधक लगाना और पुलिस बल को तैनात करना शामिल है। प्रदर्शन स्थलों पर यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े इस लिहाज से भी कुछ उपाय किए गए हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली यातायात पुलिस ने महत्वपूर्ण सीमाओं पर अपने कर्मियों को तैनात किया है ताकि आने-जाने वाले लोगों को कोई परेशान नहीं हो। इसके अलावा ट्विटर के जरिए लोगों को खुले एवं बंद मार्गों की भी जानकारी दी जा रही है। किसान नेताओं ने नए कृषि कानूनों में संशोधन का सरकार का प्रस्ताव बुधवार को खारिज कर दिया था, इसके साथ ही जयपुर-दिल्ली और यमुना एक्सप्रेस-वे को शनिवार को अवरुद्ध करके अपने आंदोलन को तेज करने की घोषणा की थी।यातायात पुलिस ने शनिवार को यात्रियों को ट्वीट कर सिंघू, औचंदी, प्याऊ मनियारी और मंगेश सीमाओं के बंद होने की सूचना दी। लोगों को लामपुर, सफियाबाद, साबोली और सिंघू स्कूल टोल टैक्स सीमाओं से आनेजाने की सलाह दी गई। यातायात पुलिस ने कहा कि मुकरबा और जीटीके रोड से मार्ग बदला गया है अत: लोगों को बाहरी रिंग रोड, जीटीके रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर जाने से बचना चाहिए। किसानों के प्रदर्शन के चलते 12 दिन से बंद पड़े दिल्ली-नोएडा चिल्ला बॉर्डर को अब खोल दिया गया है। चिल्ला बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों पक्षों में बनी सहमति के बाद बॉर्डर को ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया। रक्षा मंत्री के आवास पर किसानों की 5 सदस्यीय टीम ने मुलाकात की थी। बैठक में कृषि मंत्री भी मौजूद थे. रक्षा मंत्री के सामने 18 सूत्रीय मांगों को रखा गया था। मुख्य मांग किसान गठन आयोग की रही. मांगों में MSP का जिक्र नहीं है। एक किसान का कहना है कि हमारे नेता आज रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री से मिले। हमें आश्वासन दिया गया है कि हमारी मांगें पूरी होंगी, इसलिए हमने रास्ता खोला है। देर रात नोएडा से दिल्ली जाने वाले रास्ते पर लगे बैरिकेड हटाए गए, जिसके बाद दिल्ली जाने के लिए वाहन चालकों ने इस मार्ग का प्रयोग शुरू कर दिया। चिल्ला बॉर्डर बंद रहने के कारण दिल्ली जाने के लिए वाहन चालकों को डीएनडी और कालिंदी कुंज होकर जाना पड़ रहा था। इससे पहले शनिवार रात में दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि किसानों के विरोध के कारण नोएडा और गाजियाबाद से दिल्ली तक यातायात के लिए चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर बंद हैं। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे आनंद विहार, डीएनडी, अप्सरा और भोपुरा सीमाओं के माध्यम से दिल्ली आने के लिए वैकल्पिक मार्ग लें। यातायात पुलिस ने ट्वीट करके बताया कि टिकरी और धानसा सीमाएं भी यातायात के लिए बंद हैं, हालांकि झटीकरा सीमा दो पहिया वाहनों एवं पैदल यात्रियों के लिए खुली है। इसमें हरियाणा की ओर जाने वाले लोगों को झारोडा, दौराला, कापसहेड़ा, बडुसराय, रजोकरी एनएच-8, बिजवासन/बाजघेड़ा, पालम विमार और डूंडाहेड़ा सीमाओं से जाने को कहा गया। किसान नेताओं ने शनिवार को अपनी मांगों पर कायम रहते हुए कहा कि वे सरकार से वार्ता को तैयार हैं, लेकिन पहले तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त करने पर बातचीत होगी। बता दें कि सरकार से अनेक दौर के बाद भी अबतक सारी बैठकें बेनतीजा रही हैं.