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बलात्कार के खिलाफ सख्त हुआ गृह मंत्रालय

10 Oct, 2020 694

संवाददाता/in24 न्यूज़.
लगातार देशभर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी की है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। मंत्रालय ने आईपीसी और सीआरपीसी के प्रावधान गिनाते हुए कहा कि राज्‍य/केंद्रशासित प्रदेश इनका पालन सुनिश्चित करें। गृह मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा क‍ि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई की जानी चाहिए। एमएचए की एडवाइजरी के मुताबिक़ संज्ञेय अपराध की स्थिति में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। कानून में 'जीरो एफआईआर' का भी प्रावधान है (अगर अपराध थाने की सीमा से बाहर हुआ है)। भारतीय दंड संहिंता की धारा 166 ए (सी) के तहत, एफआईआर दर्ज न करने पर अधिकारी को सजा का प्रावधान है। सीआरपीसी की धारा 173 में बलात्‍कार से जुड़े मामलों की जांच दो महीनों में करने का प्रावधान है। एमएचए ने इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है जहां से मामलों की मॉनिटरिंग हो सकती है। सीआरपीसी के सेक्‍शन 164-A के अनुसार, बलात्‍कार/यौन शोषण की मामले की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर पीड़‍िता की सहमति से एक रजिस्‍टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर मेडिकल जांच करेगा। इंडियन एविडेंस ऐक्‍ट की धारा 32 (1) के अनुसार, मृत व्‍यक्ति का बयान जांच में अहम तथ्‍य होगा। फोरेंसिंक साइंस सर्विसिज डायरेक्‍टोरेट ने यौन शोषण के मामलों में फोरेंसिंक सबूत इकट्ठा करने, स्‍टोर करने की गाइडलाइंस बनाई हैं। उनका पालन हो। अगर पुलिस इन प्रावधानों का पालन नहीं करती तो न्‍याय नहीं हो पाएगा। अगर लापरवाही सामने आती है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई होनी चाहिए। बता दें कि इस नियम से पीड़ित महिलाओं को तत्काल कानूनी मदद मिल सकेगी.

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