नोटबंदी के एक वर्ष पूरे होने पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का सरकार पर वार
ब्यूरो रिपोर्ट / in24 न्यूज़
अर्थव्यवस्था, नोटबंदी और जीएसटी पर अब सरकार और विपक्ष में आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल ही में नोटबंदी को एक विनाशकारी आर्थिक नीति करार दिया। अहमदाबाद के दौरे पर आए मनमोहन सिंह ने कहा कि 8 नवंबर भारत के लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन है क्योंकि आज तक दुनिया में किसी भी देश ने ऐसा फैसला नहीं लिया जिसमें 86 फीसदी करेंसी को एक साथ वापस ले लिया हो। उन्होंने बताया कि जो मैंने संसद में कहा था वही आज भी कहूंगा कि नोटबंदी होने के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं क्योंकि यह कारोबारियों पर एक टेक्स टेररिज्म की तरह लागू हुआ है नोटबंदी और जीएसटी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को दोहरा झटका लगा, इसकी वजह से छोटे कारोबार की कमर टूट गई।

उन्होंने बेरोज़गारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज भारत में युवाओं को नौकरी देने के लिए चीन से सामान आयात करवाना पड़ रहा है। महात्मा गांधी ने गरीबों के लिए लड़ने की बात कही थी लेकिन 2016-17 के पहले हाफ में चीन से 1.96 लाख करोड़ का आयात हुआ था, लेकिन 2017-18 तक ये 2.14 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी पर सीधा वार करते हुए कहा कि नोटबंदी के फैसले को लोगों पर थोपा गया था। जब नोटबंदी का ऐलान हुआ तो ये सुनते ही मुझे झटका लगा था और क्या जीडीपी और नोटबंदी पर सवाल करने वाला एंटी नेशनल हो जाता है ? नोटबंदी एक तरह की संगठित लूट थी।

उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में सबसे ज्यादा मौतें रेल हादसे में हुई हैं, क्या पीएम फिर भी अभी के रेल ढांचे को सुधारने के बजाय बुलेट ट्रेन को लाना चाहेंगे? बुलेट ट्रेन का विरोध करने से कोई विकास के खिलाफ नहीं हो जाता। गुजरात सरकार पिछले कुछ समय में आदिवासियों की मदद करने में फेल रही है. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार सरोवर बांध की नींव पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी। मनमोहन सिंह ने कहा कि देश ने दो महान गुजरातियों को देखा है. महात्मा गांधी ने कहा था कि जब भी आप डाउट में रहे तो गरीबों के बारे में सोचें तो क्या पीएम मोदी ने नोटबंदी का फैसला लेने से पहले गरीबों के बारे में सोचा था ? क्या उन्होंने इनफॉर्मल सेक्टर के बारे में सोचा था ? अगर पीएम मोदी ने फैसला लेते वक्त महात्मा गांधी की बातों पर ध्यान दिया होता तो गरीबों को मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता।