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सोनम वांगचुक ने 27 दिन बाद तोड़ा भूख हड़ताल सरकार ने किया बेहतर शिक्षा व्यवस्था का वादा

24 Jul, 2026 23



लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे थे। वो अकेले नहीं थे। उनके साथ कॉकरोच जनता पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता भी थे। इन सबका एक ही मुद्दा था - NEET-UG 2026 का पेपर लीक और देश की बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था। पहले हफ्ते तक माहौल शांत था। वांगचुक रोज छात्रों से बात करते, किताबें पढ़ते और सरकार से संवाद की उम्मीद रखते। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते, उनकी सेहत गिरती गई। 15वें दिन तक उनका 5 किलो वजन कम हो चुका था। 20वें दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लिया और कहा कि किसी की जान खतरे में नहीं पड़नी चाहिए। 18 जुलाई की रात सफेद कपड़े और सिविल ड्रेस में पुलिस आई। मेडिकल टीम के साथ उन्होंने वांगचुक को तंबू से उठाया और सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर गिर गया है, शुगर 70 रह गई है और शरीर में पानी की भारी कमी है। उनकी पत्नी गीतांजलि ने अस्पताल में साफ कहा कि बिना इजाजत कोई इलाज या जबरन खाना नहीं दिया जाए। इन 27 दिनों में देश के कई बड़े नेता उनसे मिलने पहुंचे। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि "अगर शिक्षा मंत्री बदलना है तो सोनम वांगचुक जैसे लोगों को मौका मिलना चाहिए"। अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले और आदित्य ठाकरे भी जंतर-मंतर पहुंचे। सोशल मीडिया पर #StandWithSonam ट्रेंड करने लगा। आखिरकार 24 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सरकार की तरफ से बातचीत का भरोसा दिया। इसके बाद वांगचुक ने जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा।

 आखिर ऐसा क्यों हुआ
इस आंदोलन की जड़ में NEET पेपर लीक का मामला है। छात्रों का आरोप है कि पेपर पहले ही बिक गया था और लाखों बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया। वांगचुक की मांग थी कि इसकी CBI जांच हो और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। उनका कहना था कि सिस्टम में पारदर्शिता नहीं है और छात्र "कॉकरोच की तरह" ट्रीट किए जा रहे हैं।

सरकार और पुलिस की भूमिका
शुरू में सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। लेकिन जब हाईकोर्ट ने दखल दिया और वांगचुक की तबीयत ज्यादा बिगड़ने, तब जाकर बातचीत शुरू हुई। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर उन्हें अस्पताल शिफ्ट किया। अब सरकार ने कमेटी बनाकर मांगों पर विचार करने की बात कही है।

देश में क्या असर पड़ा
इस आंदोलन ने पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। कॉलेजों में छात्र प्रदर्शन करने लगे। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये अन्ना आंदोलन के बाद सबसे बड़ा छात्र-आधारित आंदोलन बन सकता है। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि भूख हड़ताल से समस्या का हल नहीं निकलेगा।

 
 आगे का रास्ता
वांगचुक अभी अस्पताल में हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। सरकार से बातचीत के लिए एक कमेटी बनेगी। CJP ने कहा है कि जब तक ठोस फैसला नहीं आता, प्रदर्शन जारी रहेगा। 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान भी पहले ही किया जा चुका है।
 
 

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