18 की उम्र तक नहीं छुई थी लेदर बॉल, फिर कैसे उड़ाया 'किंग' कोहली का स्टंप? जानिए प्रिंस यादव के फर्श से अर्श तक की कहानी
क्रिकेट की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि अगर आपको प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना है, तो बचपन से ही एकेडमी की बारीकियां सीखनी पड़ती हैं। लेकिन दिल्ली के युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। जिस उम्र में अधिकांश युवा क्रिकेटर डोमेस्टिक और ऐज-ग्रुप क्रिकेट खेलकर स्थापित हो चुके होते हैं, उस 18 साल की उम्र तक प्रिंस यादव ने चमड़े (लेदर) की गेंद से क्रिकेट खेला ही नहीं था। उनका पूरा बचपन और शुरुआती क्रिकेट सिर्फ और सिर्फ टेनिस बॉल टूर्नामेंट्स तक सीमित था।
आज वही प्रिंस यादव आईपीएल (IPL) के मंच पर देश और दुनिया की सुर्खियों में हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) की तरफ से खेलते हुए जब उन्होंने 140 किमी/घंटा से भी तेज रफ्तार की इन-स्विंग गेंद पर दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली का ऑफ-स्टंप उखाड़ा, तो पूरा क्रिकेट जगत हैरान रह गया।
प्रिंस यादव के पिता राम निवास (रिटायर्ड आरपीएसएफ हेड कांस्टेबल) चाहते थे कि उनका बेटा किसी तरह पढ़ाई-लिखाई कर एक सुरक्षित सरकारी नौकरी पा ले। पिता के दबाव में प्रिंस ने दिल्ली पुलिस भर्ती और ग्रुप-डी जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भी भरे। लेकिन प्रिंस का मन पढ़ाई या दफ्तर की फाइलों में नहीं, बल्कि क्रिकेट के मैदान में बसता था।
दिन-रात टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने वाले प्रिंस की सटीक और खतरनाक यॉर्कर की चर्चा दिल्ली के लोकल मैदानों में होने लगी थी। तभी उनकी प्रतिभा पर दिल्ली के नामचीन कोच सतीश वशिष्ठ की नजर पड़ी।
जब कोच सतीश वशिष्ठ ने प्रिंस को पहली बार अपनी एकेडमी में बुलाया, तो 18 साल का यह लड़का अपनी जेब और हाथ में सिर्फ दो टेनिस बॉल लेकर पहुंचा था। कोच ने जब उनसे गेंदबाजी करने को कहा, तो प्रिंस की रफ्तार और सटीक पैर तोड़ने वाली यॉर्कर (Toe-crushing yorkers) देखकर वे दंग रह गए।
कोच ने उसी दिन प्रिंस को चेतावनी देते हुए कहा था, "बेटा, तुम्हारी उम्र 18 साल हो चुकी है। इस उम्र तक आधे खिलाड़ियों का करियर ढलान पर आ जाता है, तुमने अभी लेदर बॉल को छुआ भी नहीं है। तुम्हें दूसरों से दोगुनी मेहनत करनी होगी।"
प्रिंस का यह सफर आसान नहीं रहा। 2019 में एज-फजिंग (उम्र के विवाद) के कारण उन पर दो साल का प्रतिबंध लग गया। इस झटके ने किसी भी खिलाड़ी का मनोबल तोड़ दिया होता, लेकिन प्रिंस ने हार नहीं मानी। प्रतिबंध के दौरान उन्होंने अपनी फिटनेस, रन-अप और स्विंग पर दिन-रात काम किया।
जब वे मैदान पर लौटे, तो दिल्ली की रणजी टीम के लिए नेट बॉलर के रूप में चुने गए। नेट सेशन में अपनी धारदार गेंदबाजी से उन्होंने सीनियर बल्लेबाजों को छकाया और आखिरकार दिल्ली की मुख्य टीम में जगह बनाई। उनकी इसी काबिलियत को देखते हुए आईपीएल नीलामी में उन्हें लखनऊ सुपर जायंट्स ने अपनी टीम में शामिल किया।
आईपीएल 2026 के एक मुकाबले में रॉयल चलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ प्रिंस यादव का सामना सीधे विराट कोहली से हुआ। प्रिंस ने बाद में खुलासा किया कि इस मैच से कुछ दिन पहले ही उन्होंने विराट कोहली से बातचीत की थी और गेंदबाजी को लेकर टिप्स मांगे थे। तब विराट ने मुस्कुराते हुए उनसे कहा था, "अगर तुम्हारी गेंद ऑफ-स्टंप की लाइन पर मूव कर रही है, तो बिना हिचकिचाए उसी लेंथ पर टिके रहो।"
मैच के दौरान प्रिंस यादव ने ठीक वही किया। उन्होंने ऑफ-स्टंप की लाइन पर टप्पा गिराया और गेंद तेजी से अंदर की तरफ कांटा बदलती हुई आई। जब तक विराट का बल्ला नीचे आता, गेंद उनके ऑफ-स्टंप को उखाड़ चुकी थी। विराट शॉक रह गए और प्रिंस यादव का नाम रातों-रात पूरे देश की जुबान पर चढ़ गया। उसी मैच में उन्होंने 3 विकेट चटकाकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी।
एक समय पर जिसके पास स्पाइक शूज और क्रिकेट किट खरीदने के पैसे नहीं थे और जो सिर्फ टेनिस बॉल की इनामी राशि जीतकर अपना गुजारा चलाता था, आज वह भारत के सबसे होनहार तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल हो चुका है। प्रिंस यादव का कहना है कि अगर आपके अंदर कड़ी मेहनत और कुछ हासिल करने का पक्का जुनून है, तो उम्र और परिस्थितियां आपके रास्ते की रुकावट कभी नहीं बन सकतीं।