25 बागी विधायकों ने दिया 14 दिनों का अल्टीमेटम, मंत्रिमंडल बर्खास्त करने की मांग
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेतृत्व वाली उमर अब्दुल्ला सरकार अंदरूनी बगावत से घिर गई है। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार और पुनर्गठन के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के कम से कम 25 नाराज विधायकों ने पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को 14 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। बागी विधायकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें तय समय सीमा के भीतर पूरी नहीं की गईं, तो वे राजभवन जाकर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेंगे। इस अंदरूनी असंतोष के कारण 90 सीटों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उमर अब्दुल्ला सरकार के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। सियासी संकट की शुरुआत हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हुई। 90 सदस्यीय विधानसभा में नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 9 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। खाली पड़े 3 पद भरे जाने के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ और शिक्षित विधायक मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से नाराज हो गए।
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विधायकों का दर्द: कई विधायकों ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने रोते हुए मीडिया के सामने कहा कि वे कानून में स्नातक (Law Graduate) होने के बावजूद दरकिनार कर दिए गए, जबकि कम पढ़े-लिखे विधायकों को मंत्री पद दे दिया गया।
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गुप्त बैठक: लोलाब से विधायक कैसर जमशीद लोन के आवास पर बागी विधायकों की एक गुप्त बैठक हुई, जिसमें कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र के विधायक शामिल हुए।
उमर अब्दुल्ला को भेजे गए अल्टीमेटम में बागी विधायकों ने सरकार के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं:
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पूरे मंत्रिमंडल को बर्खास्त करना: बागी गुट ने मांग की है कि वर्तमान मंत्रिमंडल को तुरंत भंग किया जाए और आम सहमति से नए सिरे से कैबिनेट का गठन हो।
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सलाहकारों की छुट्टी: मुख्यमंत्री के प्रमुख राजनीतिक सलाहकारों और उपमुख्यमंत्री को पद से हटाने की मांग की गई है।
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पार्टी में लोकतंत्र: सरकार और पार्टी के भीतर एकतरफा फैसलों के बजाय विधायकों की बात सुनने और आंतरिक लोकतंत्र बहाल करने की मांग रखी गई है।
संकट को और बढ़ाते हुए श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने 3 नवंबर 2026 को नेशनल कॉन्फ्रेंस की सदस्यता और अपनी लोकसभा सीट से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। रुहुल्लाह मेहदी ने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व धारा 370 की बहाली और कैदियों की रिहाई जैसे चुनावी वादों से पूरी तरह भटक गया है। दूसरी तरफ, नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रवक्ता इफ्रा जान और पार्टी आलाकमान ने बगावत की खबरों को खारिज करने की कोशिश की है। पार्टी का कहना है कि किसी भी मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक-दो विधायकों का नाराज होना स्वाभाविक प्रक्रिया है और 20-25 विधायकों के बागी होने की खबरें निराधार हैं। फिलहाल, 14 दिनों की समयसीमा ने उमर अब्दुल्ला सरकार की धड़कनें बढ़ा दी हैं और आने वाले दिन जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।