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होर्मुज को लेकर अमेरिका-ईरान में तनाव बरकरार, बातचीत के बीच ट्रंप ने मांगा मुआवजा

11 Aug, 2026 9

होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजा मांगेंगे, जिनकी मौत या गंभीर चोट ईरान से जुड़े संघर्षों और हमलों में हुई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है, इसलिए बातचीत का रास्ता अभी आसान नहीं दिख रहा है।

ईरान की तरफ से होर्मुज को खोलने के लिए कई शर्तें रखी गई हैं। इनमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाना, सैन्य दबाव खत्म करना और संघर्ष से हुए नुकसान के लिए मुआवजा जैसी मांगें शामिल हैं। ईरान का कहना है कि इन मुद्दों पर प्रगति के बिना जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना मुश्किल होगा। दूसरी तरफ ट्रंप ने अब ईरान से मुआवजा मांगकर बातचीत में एक और बड़ा मुद्दा जोड़ दिया है। इससे दोनों देशों के बीच समझौते की कोशिश और मुश्किल हो सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस दूसरे देशों तक पहुंचती है। यही वजह है कि इसके लंबे समय तक बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। तेल की कीमतों में बदलाव का असर आगे चलकर कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर भी पड़ सकता है। इसलिए दुनिया के कई देश इस रास्ते को सुरक्षित और सामान्य तरीके से दोबारा खोलने की कोशिशों पर नजर रख रहे हैं।

फिलहाल ईरान और ओमान के बीच नए समुद्री रास्तों को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है। हालांकि, इसे होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने के बराबर नहीं माना जा रहा है। ईरान की शर्तें और अमेरिका की मांगें अभी अलग-अलग हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बातचीत के जरिए दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंचते हैं या नहीं, यह अहम होगा।

अब पूरी दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही बातचीत पर है। अगर यह रास्ता सुरक्षित तरीके से दोबारा खुलता है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार को राहत मिल सकती है। लेकिन अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है और समझौता नहीं होता, तो ऊर्जा बाजार पर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और आगे होने वाली कूटनीतिक कोशिशों से ही साफ होगा कि होर्मुज कब और किन शर्तों के साथ दोबारा खुलता है।

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