Breaking News

भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे देश के आईआईटी संस्थान केंद्र सरकार दे रही विशेष प्रोत्साहन

07 Nov, 2026 12

 

भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश के प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बड़े पैमाने पर जुट गए हैं। केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के तहत सभी प्रमुख आईआईटी संस्थानों को अपने स्वदेशी मॉडल, तकनीकी उत्पाद और विशेष पाठ्यक्रम विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक का उपयोग करके स्वास्थ्य, शिक्षा, रोबोटिक्स और बुनियादी ढांचे से जुड़ी वास्तविक जीवन की चुनौतियों का समाधान खोजना और देश की तकनीकी क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

इस राष्ट्रीय अभियान के तहत देश के अलग-अलग आईआईटी संस्थान अपनी विशेषज्ञता के आधार पर नए शोध और नवाचार कर रहे हैं। आईआईटी खड़गपुर में रोबोटिक्स और भौतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर शोध को बढ़ावा देने के लिए विशेष केंद्र की स्थापना की जा रही है, जबकि आईआईटी बीएचयू शैक्षणिक सत्र 2027-28 से भौतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता में चार वर्षीय बीटेक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। वहीं आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने मानव मस्तिष्क की तर्ज पर एक ऐसा अनोखा उपकरण विकसित किया है जो सामान्य उपकरणों की तुलना में 500 गुना कम ऊर्जा खपत में चेहरे की पहचान कर सकता है।

इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और जन-कल्याण के क्षेत्र में तकनीक के उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास चिकित्सा डेटा के विश्लेषण, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों व पेशेवरों के कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वहीं आईआईटी जोधपुर में स्थापित विशेष जनरेटिव सेंटर के माध्यम से शिक्षा और बुनियादी ढांचे की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान ढूंढे जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन से इन संस्थानों के जरिए देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा मिलेगी।

अन्य खबरे