सिद्धिविनायक के दान पर सियासी बवाल! 5 साल का हिसाब मांगा, करोड़ों के गहनों की होगी जां
06 Aug, 2026
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मुंबई के प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर को लेकर अब सियासत गर्म हो गई है। देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक यहां हर दिन लाखों का चढ़ावा आता है। नकदी के साथ-साथ सोना, चांदी और कीमती गहने भी भक्त दान में चढ़ाते हैं। लेकिन अब इसी दान के हिसाब पर सवाल उठ गए हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने हाल में आरोप लगाया कि मंदिर में मिलने वाले दान की रकम में हर साल गड़बड़ी हो रही है और करोड़ों का हिसाब गायब है। उनके इस बयान के बाद मामला राजनीतिक बहस बन गया। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला ले लिया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के पिछले 5 साल के नकद दान, गहनों और अन्य कीमती वस्तुओं का विशेष ऑडिट कराने का आदेश दे दिया है। सरकार का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े पैसे का पारदर्शी हिसाब होना जरूरी है। जांच की जिम्मेदारी राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता को सौंपी गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि 5 साल के रिकॉर्ड में क्या निकलकर सामने आता है।
5 अगस्त 2026 को लिया गया फैसला
ये फैसला 5 अगस्त 2026 को सामने आया। इससे एक दिन पहले यानी 4 अगस्त को मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी। उसी मुलाकात के बाद सरकार ने ऑडिट का आदेश जारी किया। 6 अगस्त को खबर मीडिया में प्रमुखता से आई और पूरे महाराष्ट्र में चर्चा शुरू हो गई। दरअसल पिछले कुछ हफ्तों से राज ठाकरे लगातार मंदिर के दान को लेकर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा था कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल करोड़ों का दान आता है लेकिन उसका सही उपयोग नहीं हो रहा। उनके इस आरोप के बाद भाजपा और विपक्ष दोनों आमने-सामने आ गए। सरकार ने आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा और सीधे जांच का रास्ता चुना। 5 साल की अवधि इसलिए चुनी गई ताकि एक साथ लंबे समय का डेटा देखा जा सके। अब ऑडिट टीम ये जांचेगी कि 2021 से 2026 तक मंदिर को कितना नकद दान मिला, कितने गहने चढ़े, उनका रिकॉर्ड कहां है और बैंक में कितना जमा हुआ।
मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट की होगी जांच
जांच का केंद्र मुंबई का प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट है। प्रभादेवी इलाके में स्थित ये मंदिर पूरे साल भक्तों से भरा रहता है। सोमवार और गणेश चतुर्थी के दिन तो यहां पैर रखने की जगह नहीं होती। मंदिर की लोकप्रियता की वजह से हर महीने करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। इसके अलावा भक्त सोने की चेन, चांदी के मुकुट और अन्य कीमती सामान भी दान करते हैं। इसी वजह से मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। सरकार ने साफ कहा है कि जांच सिर्फ नकदी तक सीमित नहीं रहेगी। ऑडिट टीम दान रजिस्टर, बैंक खाते, गहनों का स्टॉक रजिस्टर, लॉकर और प्रशासनिक फाइलें सब खंगालेगी। ये भी देखा जाएगा कि पिछले 5 साल में ट्रस्ट में कौन-कौन पदाधिकारी थे और उन्होंने किस तरह वित्तीय कामकाज संभाला। मंदिर प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि उनके सभी रिकॉर्ड सही हैं और वो जांच में पूरा सहयोग करेंगे। लेकिन राजनीतिक गलियारों में ये सवाल जरूर है कि आखिर इतने बड़े मंदिर के हिसाब पर सवाल क्यों उठे।
जांच का केंद्र मुंबई का प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट है। प्रभादेवी इलाके में स्थित ये मंदिर पूरे साल भक्तों से भरा रहता है। सोमवार और गणेश चतुर्थी के दिन तो यहां पैर रखने की जगह नहीं होती। मंदिर की लोकप्रियता की वजह से हर महीने करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। इसके अलावा भक्त सोने की चेन, चांदी के मुकुट और अन्य कीमती सामान भी दान करते हैं। इसी वजह से मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। सरकार ने साफ कहा है कि जांच सिर्फ नकदी तक सीमित नहीं रहेगी। ऑडिट टीम दान रजिस्टर, बैंक खाते, गहनों का स्टॉक रजिस्टर, लॉकर और प्रशासनिक फाइलें सब खंगालेगी। ये भी देखा जाएगा कि पिछले 5 साल में ट्रस्ट में कौन-कौन पदाधिकारी थे और उन्होंने किस तरह वित्तीय कामकाज संभाला। मंदिर प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि उनके सभी रिकॉर्ड सही हैं और वो जांच में पूरा सहयोग करेंगे। लेकिन राजनीतिक गलियारों में ये सवाल जरूर है कि आखिर इतने बड़े मंदिर के हिसाब पर सवाल क्यों उठे।
क्यों हुआ ऑडिट और कैसे होगी जांच
आखिर सरकार को अचानक विशेष ऑडिट की जरूरत क्यों पड़ी। इसकी वजह सीधे राज ठाकरे के आरोप हैं। उन्होंने कहा था कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल आने वाले दान का एक बड़ा हिस्सा हिसाब में नहीं दिखता। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और विधानसभा दोनों जगह हंगामा हुआ। सरकार दबाव में आई और उसने पारदर्शिता दिखाने के लिए ऑडिट का ऐलान कर दिया। अब अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता की टीम पूरे रिकॉर्ड की जांच करेगी। वो ये देखेंगी कि मंदिर में आने वाले हर रुपये और हर गहने की एंट्री सही हुई या नहीं। बैंक में जमा राशि और रजिस्टर में लिखी राशि में कोई अंतर तो नहीं। गहनों को कहां रखा गया, उनकी सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं। अगर जांच में कोई गड़बड़ी मिलती है तो सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। अगर सब सही पाया जाता है तो मंदिर ट्रस्ट को क्लीन चिट मिल जाएगी। फिलहाल किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है। सरकार का मकसद सिर्फ इतना है कि भक्तों का भरोसा बना रहे। क्योंकि धार्मिक स्थानों पर लोग श्रद्धा से दान करते हैं और उन्हें लगता है कि उनका पैसा सही जगह लगेगा।
अब आगे क्या होगा
फिलहाल ये मामला जांच के स्टेज में है। असीम गुप्ता की टीम अब मंदिर के 5 साल के दस्तावेज इकट्ठा करेगी और रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। अगर सब रिकॉर्ड सही मिलता है तो ये मंदिर प्रशासन के लिए राहत की बात होगी और आरोपों का जवाब भी मिल जाएगा। लेकिन अगर कोई अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तय है। साथ ही सरकार मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम भी ला सकती है। सिद्धिविनायक मंदिर सिर्फ मुंबई का नहीं पूरे देश के करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। इसलिए यहां दान के एक-एक रुपये का हिसाब साफ होना चाहिए। 5 अगस्त का ये फैसला उसी दिशा में पहला कदम है। अब देखना होगा कि ऑडिट रिपोर्ट कब आती है और उसमें क्या खुलासे होते हैं। तब तक ये विवाद थमने वाला नहीं है।
आखिर सरकार को अचानक विशेष ऑडिट की जरूरत क्यों पड़ी। इसकी वजह सीधे राज ठाकरे के आरोप हैं। उन्होंने कहा था कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल आने वाले दान का एक बड़ा हिस्सा हिसाब में नहीं दिखता। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और विधानसभा दोनों जगह हंगामा हुआ। सरकार दबाव में आई और उसने पारदर्शिता दिखाने के लिए ऑडिट का ऐलान कर दिया। अब अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता की टीम पूरे रिकॉर्ड की जांच करेगी। वो ये देखेंगी कि मंदिर में आने वाले हर रुपये और हर गहने की एंट्री सही हुई या नहीं। बैंक में जमा राशि और रजिस्टर में लिखी राशि में कोई अंतर तो नहीं। गहनों को कहां रखा गया, उनकी सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं। अगर जांच में कोई गड़बड़ी मिलती है तो सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। अगर सब सही पाया जाता है तो मंदिर ट्रस्ट को क्लीन चिट मिल जाएगी। फिलहाल किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है। सरकार का मकसद सिर्फ इतना है कि भक्तों का भरोसा बना रहे। क्योंकि धार्मिक स्थानों पर लोग श्रद्धा से दान करते हैं और उन्हें लगता है कि उनका पैसा सही जगह लगेगा।
अब आगे क्या होगा
फिलहाल ये मामला जांच के स्टेज में है। असीम गुप्ता की टीम अब मंदिर के 5 साल के दस्तावेज इकट्ठा करेगी और रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। अगर सब रिकॉर्ड सही मिलता है तो ये मंदिर प्रशासन के लिए राहत की बात होगी और आरोपों का जवाब भी मिल जाएगा। लेकिन अगर कोई अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तय है। साथ ही सरकार मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम भी ला सकती है। सिद्धिविनायक मंदिर सिर्फ मुंबई का नहीं पूरे देश के करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। इसलिए यहां दान के एक-एक रुपये का हिसाब साफ होना चाहिए। 5 अगस्त का ये फैसला उसी दिशा में पहला कदम है। अब देखना होगा कि ऑडिट रिपोर्ट कब आती है और उसमें क्या खुलासे होते हैं। तब तक ये विवाद थमने वाला नहीं है।