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आंध्र प्रदेश में महिलाओं की शिकायत पर ध्यान नहीं देनेवाले पुलिस वालों पर खुद शुरू होगी कार्रवाई

25 Jan, 2020 1122

संवाददाता/in24 न्यूज़.

कई बार ऐसा देखा जाता है कि पुलिस थानों में रेप व छेड़खानी जैसे मामलों के फरियादियों की शिकायत को या तो सुना या लिखा नहीं जाता है या उसे लटका दिया जाता है, जिससे उन्हें समय से न तो मदद मिलती है और न ही अपराधियों को सजा मिल पाती है। अब ऐसा आंध्र प्रदेश में नहीं हो पाएगा। अगर इस तरह की कोई शिकायत आती है तो अब उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई अपने आप शुरू हो जाएगी। एपी दिशा कानून के तहत अगर कोई रेप या छेड़खानी की पीड़िता अगर पीड़ित थाने पहुंच कर शिकायत करती हैं और वहां मौजूद पुलिस अधिकारी सहित अन्य कर्मचारी उसकी शिकायत दर्ज करने में अगर आना-कानी करते हैं तो ऐसे लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। पीडितों की शिकायत दर्ज नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 166/ए के तहत कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों की मानें तो पूर्वी गोदावरी जिले में रेप पीड़िता की शिकायत दर्ज करने में विलंब करने के आरोप में एक सब-इस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू हो गई है। आंध्र में दिशा एक्ट के सुचारु क्रियान्वयन के लिए वाईएस जगन सरकार ने युवा आईपीएस अधिकारी दीपिका एम पाटिल को नियुक्त किया है। दीपिका पाटिल की अगर मानें तो राज्य में महिलाओं के साथ होने वाली जघन्य अपराधों की जांच जल्द से जल्द पूरी कर अपराधियों को सजा दे सके, इसके लिए सबसे पहले पुलिस को वुमेन्स फ्रेंडली बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए राज्यभर में कुल 18 महिला पुलिस स्टेशन बनाए जा रहे हैं जिनमे अधिकांश महिला पुलिसकर्मी रहेंगी। इनमें एक डीएसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल रहेंगे। शिकायत दर्ज होने के 21 दिन के भीतर जांच पूरी कर दोषियों को सजा सुनाने के लिए जरूरी पुलिस स्टेशन, विशेष अदालतें, साइबर एक्सपर्ट्स टीम, फोरेंसिक लैब आदि की हर जिले में व्यवस्था की जा रही है और इसके लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपए मंजूर भी किए हैं।

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