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दिवाली से पहले गैस चैंबर बनी दिल्ली! जहांगीरपुरी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 449 पार

03 Nov, 2026 16



दिल्ली और पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अभी दिवाली के पटाखे फूटे भी नहीं हैं, लेकिन हवा का मिज़ाज ऐसा हो गया है मानो किसी ने आबो-हवा में ज़हर घोल दिया हो। ठंड की दस्तक के साथ ही राजधानी एक बार फिर उसी पुराने संकट के मुहाने पर खड़ी दिख रही है। दिल्ली का औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 330 के पार निकल चुका है, जबकि शहर के आठ से ज़्यादा इलाकों में यह 400 के ख़तरनाक स्तर को पार कर गया है। सबसे ख़राब हालात उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के जहांगीरपुरी में हैं, जहाँ वायु गुणवत्ता सूचकांक 449 दर्ज किया गया। ऐसे में सड़कों पर निकलना और सांस लेना किसी ज़हरीली गैस को फेफड़ों में खींचने जैसा महसूस हो रहा है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पूरे दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में तुरंत प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का दूसरा चरण यानी 'ग्रैप-2' लागू कर दिया है। जहांगीरपुरी के अलावा रोहिणी, पंजाबी बाग, अलीपुर, बवाना और विवेक विहार जैसे इलाकों में भी वायु प्रदूषण का स्तर 400 से ऊपर बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में हवा की रफ्तार धीमी होने और तापमान में गिरावट आने की वजह से धूल और धुएं के बारीक कण ज़मीन के पास ही जम गए हैं। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों से आने वाले पराली के धुएं और गाड़ियों के उत्सर्जन ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

ग्रैप का दूसरा चरण लागू होने के बाद अब पूरे क्षेत्र में कड़ी पाबंदियां प्रभावी हो गई हैं। सड़कों पर निजी गाड़ियों की संख्या कम करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। शहर के किसी भी होटल, रेस्तरां या ढाबे में कोयला, लकड़ी या तंदूर के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अलावा आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी जगहों पर डीजल जनरेटर चलाने पर पाबंदी रहेगी। सड़कों से धूल हटाने के लिए मशीनी सफाई और पानी का छिड़काव तेज़ कर दिया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को सुबह-शाम बाहर घूमने या कसरत करने से बचने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि हवा में सूक्ष्म प्रदूषक कणों (पीएम 2.5) का स्तर इतना ज़्यादा है कि यह सीधे फेफड़ों में पहुंचकर बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। जब तक मौसम का मिज़ाज नहीं बदलता या हवा की रफ्तार नहीं बढ़ती, तब तक दिल्ली-एनसीआर के लोगों को इस धुंध और ज़हरीले धुएं से राहत मिलने की उम्मीद कम ही नज़र आ रही है।

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