नेताओं ने मचाया संसद में हुड़दंग
संवाददाता/in24 न्यूज़।
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आज जिस तरह राजनीतिक पार्टी के सदस्य संसद में हंगामा मचाते हैं उससे लगता है कि अब अनुशासन से उनका कोई वास्ता नहीं रह गया है। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन में कल विपक्षी दल के कुछ सदस्यों के महासचिव और रिपोर्टर की मेज पर चढ कर हंगामा करने की घटना को सदन का अपमान बताते हुए इसकी आज कड़ी निन्दा की। नायडू ने सदन की कार्यवाही शुरु करते ही कल की घटना का उल्लेख किया मानसून सत्र के दौरान कुछ सदस्यों में प्रतिस्पर्धा की भावना पनपी है जो दुखद है। किसी भी पवित्र स्थान की अवमामना गलत है। मंदिर का गर्भगृह बहुत महत्वपूर्ण होता है। लोकतंत्र में यह सदन भी एक मंदिर के समान है। यहां महासचिव और रिपोर्टर बैठते हैं। कल कुछ सदस्यों ने यहां गलत कार्य किया और सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाई। गौरतलब है कि कल विपक्षी दलों के सदस्य कृषि कानूनों और पेगासस जासूसी मामले को लेकर हंगामा कर रहे थे। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, तृणमूल कांग्रेस की मौसम नूर, कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के शिवदासन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम ने महासचिव के मेज पर बैठकर जोरदार नारेबाजी की। ये सदस्य मेज भी बजा रहे थे। अन्य सदस्य शाेर गुल कर रहे थे। इससे पहले कांग्रेस के रिपुन बोरा, दीपेन्द्र हुड्डा और कांग्रेस के राजमणि पटेल भी मेज पर खडे हो गये थे। उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकेया नायडू ने कल की घटना पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि कल जो कुछ सदन में हुआ, उसकी निंदा करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर होता है और इसकी पवित्रता पर आंच नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं बहुत दुख के साथ यह कहने के लिए खड़ा हुआ हूं कि इस सदन की गरिमा जिस तरह से भंग की गई और वो भी प्रतिद्वंद्विता की भावना से, वह बहुत चिंताजनक है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे जैसे विभिन्न धर्मों के पवित्र स्थल हैं, वैसे ही देश के लोकतंत्र का मंदिर है हमारी संसद। टेबल एरिया, जहां महासचिव और पीठासीन पदाधिकारी बैठते हैं, उसे सदन का गर्भगृह माना जाता है। बता दें कि दिन ब दिन संसद में शोर मचाने का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है।