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बारिश के लिए ग्रामीणों ने सरपंच और मुखिया को गधे पर बैठाकर गांव में घुमाया

15 Jul, 2021 844

संवाददाता/in24 न्यूज़.
एक तरफ जहां देश विकास के रास्ते पर बढ़ता जा रहा है, वहीं अंधविश्वास भी पैर जमाए बैठा है। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में एक बार फिर बारिश के लिए अजीबो-गरीब टोटके करने का मामला सामने आया है। इस बार इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए ग्रामीणों ने सरपंच एवं गांव के मुखिया को गधे पर बैठाकर गांव में घुमाया। गांव वालों की आस्था है कि इस तरह का टोटका करने से रूठे इंद्रदेव अच्छी बरसात करेंगे। घटना सरसी गांव की है, जहां किसानों ने बारिश के लिए अजीबो-गरीब टोटके का सहारा लिया। यहां इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए ग्रामीण किसान तमाम तरह के जतन किए जा रहे हैं। सोयाबीन की फसल की बुवाई के बाद मानसून की बेरुखी से परेशान ग्रामीणों ने अब टोटकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। रतलाम जिले के गांव सरसी में बारिश के लिए ग्रामीणों ने गांव के सरपंच एवं गांव के मुखिया को गधे पर बैठाकर गांव में घुमाया। ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि बारिश नहीं होने पर इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए गांव के मुखिया द्वारा गधे की सवारी कर देवी देवताओं का पूजन करने से अच्छी बारिश होती है।  इसके लिए गांव के सरपंच प्रतिनिधि राजेश चत्तर एवं मुखिया विनोद पटेल को गधे की सवारी कराई गई। यह सवारी ढोल और नगाड़े के साथ निकली। इसके बाद गांव के लोगों ने देवी-देवताओं की पूजा अर्चना कर अच्छी बारिश की प्रार्थना की। यह सवारी सरसी के राजा हनुमान मन्दिर से प्रारम्भ हुई एवं पूरे गांव में घूमकर श्मशान पहुंची। गधे की सवारी की शोभायात्रा निकालने वाले ग्रामीणों ने बताया कि- पुराने दौर में बारिश नहीं होने पर रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिए गांव के राजा को गधे पर बैठकर सवारी करते थे और देवी देवताओं की पूजा कर बारिश के लिए प्रार्थना करते थे। वर्तमान के दौर में गांव के सरपंच और मुखिया राजा होते हैं, इसलिए इंद्रदेव को मनाने के लिए गधे की सवारी निकाली गई। गांव वालों की आस्था है कि इस तरह का टोटका करने से रूठे इंद्रदेव अच्छी बरसात करेंगे लंबे समय से बारिश नही होने से परेशान किसान अपनी मुरझाई फसलों को देख तरह-तरह के टोटके करने पर मजबूर है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही अच्छी बरसात होगी जिससे उनके मुरझाई फसल फिर से खिल उठेगी और बड़ी राहत मिलेगी। बता दें कि इस टोटके से कुछ हो या न हो, ग्रामीणों का विश्वास अवश्य बढ़ जाता है। 

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