हर कीमत पर गांव लौटना चाहते हैं प्रवासी मज़दूर
संवाददाता/in24 न्यूज़.
कोरोना काल में अगर प्रवासी मज़दूरों की बात की जाए तो वे हर कीमत पर अपने गांव जाने के लिए बेकरार नज़र आ रहे हैं। हर रोज ढाई लाख के करीब नए केस आ रहे हैं, जिसकी वजह से अस्पतालों में बेड्स की कमी है, ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है तो कहीं टेस्ट नहीं हो रहे हैं। इस महासंकट की रफ्तार को रोकने के लिए कई राज्य सरकारों ने अपने यहां लॉकडाउन समेत कई पाबंदियां लगा दी हैं। 2021 की इस तालाबंदी ने फिर सड़कों पर उसी नज़ारे को फिर से जिंदा कर दिया है, जहां लाखों की संख्या में मजदूर घर वापसी के लिए निकल पड़े हैं। दिल्ली हो या राजस्थान या फिर गुजरात और महाराष्ट्र हर तरफ से एक ही तरह की तस्वीरें सामने आ रही हैं। जहां हजारों की संख्या में मजदूरों की भीड़ अपने घर वापस जाने को बेकरार है। बात अगर दिल्ली की करें तो कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार पर काबू पाने के लिए राजधानी में अगले सोमवार सुबह तक लॉकडाउन लगा दिया गया है। लॉकडाउन की घोषणा के तुरंत बाद ही एक बार फिर से लोगों का पलायन शुरू हो गया। लॉकडाउन के कारण अपने घर जाने के लिए आनंद विहार बस टर्मिनल पर हजारों लोग पहुंच गए। यूपी परिवहन निगम का कौशाम्बी बस अड्डे से यूपी और बिहार जाने वाली बसें पूरी भरकर जा रही हैं। आज आनंद विहार, सराय काले खां सहित सभी बस अड्डों और कई निजी बस अड्डों पर अपने घर से दूर काम कर रहे कामगार घर को वापस लौटते हुए दिखाई दिए। कई यात्रियों को डर है कि लॉकडाउन का समय पहले की तरह ही आगे बढ़ सकता है, इसलिए वो अपना पूरा सामान लेकर घर जा रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रवासी मजदूरों से दिल्ली में ही रहने की अपील की है और कहा है कि मैं हूं न। एक प्रवासी ने बातचीत में बताया कि लॉकडाउन के बाद हमारे पास कोई काम नहीं है, कोई भी मकान मालिक या सरकार हमें लॉकडाउन के दौरान मदद नहीं करेगा। इसलिए हम अपने घर जाना ही बेहतर समझ रहे हैं। मज़दूरों की परेशानी देखकर यही लग रहा है जैसे वे मान बैठे हैं कि देख लिया हमने जग सारा, अपना घर है सबसे प्यारा!