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CJI के एक तंज से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक मीम से शुरू हुई कॉकरोच क्रांति की पूरी कहानी

26 Jul, 2026 480

जंतर-मंतर पिछले एक महीने से सोया नहीं है। यहां रोज सुबह से रात तक "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" के नारे गूंजते हैं। ये आवाज कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP की है। NEET का पेपर लीक, OSM सिस्टम की गड़बड़ी और उसके बाद बच्चों की आत्महत्या ने इस आंदोलन को जन्म दिया।20 जून को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अमेरिका से सीधे दिल्ली उतरे और एयरपोर्ट से जंतर-मंतर पहुंच गए। हाथ में संविधान और अंबेडकर की किताब थी। उन्होंने कहा "हम मोर्चा संभाले हुए हैं, लेकिन तुम्हारे बिना ये लड़ाई अधूरी है"।दिल्ली पुलिस ने सिर्फ शाम 5 बजे तक इजाजत दी थी। पर लड़के माने नहीं। रातभर डटे रहे। अभिजीत ने कहा "जब तक अयोग्य शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, हम यहां से नहीं हटेंगे"।आंदोलन की पहचान बन गई थाली-चम्मच। अभिजीत ने सबसे कहा "थाली लेकर आना"। उनका तर्क था कि जिस तरह कोरोना में थाली बजाने से आवाज पहुंची थी, उसी तरह अब शिक्षा मंत्री तक आवाज पहुंचेगी। फिर क्या था, पूरा जंतर-मंतर "गो प्रधान गो" से गूंज उठा।भीड़ में ज्यादातर NEET री-एग्जाम वाले बच्चे थे। कुछ ने "मैं हूं कॉकरोच" वाले मास्क पहने थे। कुछ के हाथ में फूल, कुछ के हाथ में "बेटा, तुमसे ना हो पाएगा" वाले पोस्टर। सोनम वांगचुक भी आए और उन छात्रों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने पेपर लीक के बाद जान दे दी।ये सिर्फ दिल्ली नहीं है। पुणे, लखनऊ, बेंगलुरु, जयपुर, हैदराबाद तक CJP पहुंच चुकी है। हर जगह थाली बज रही है, हर जगह एक ही मांग है।

बात सिर्फ पेपर की नहीं है। बात भरोसे की है। अभिजीत हर बार कहते हैं "तुम 4 मिनट लेट होने पर बच्चे को बाहर कर देते हो, लेकिन मंत्री अपनी कुर्सी नहीं छोड़ता"।पेपर लीक हुआ, दोबारा परीक्षा हुई। बच्चे डिप्रेशन में गए। कुछ ने सुसाइड कर लिया। माता-पिता कर्ज में डूब गए। ऊपर से कोर्ट में किसी ने इन्हें "कॉकरोच" कह दिया। उसी अपमान को इन्होंने अपनी पहचान बना लिया।CJP का कहना साफ है - जब तक CBI जांच नहीं और मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, ये धरना नहीं रुकेगा।

सरकार ने बातचीत का दरवाजा खोला है। जेपी नड्डा मिल चुके हैं। लेकिन CJP अड़ी है। अभिजीत ने कहा "अगर 7 दिन में इस्तीफा नहीं आया तो जेल भरो आंदोलन करेंगे"।पुलिस ने पानी, लाइट और शौचालय तक बंद कर दिए। मदद करने वालों से आधार कार्ड मांगा जा रहा है। संजय राउत जैसे नेता कह रहे हैं कि सरकार आंदोलन को दबा रही है।अगले हफ्ते फिर बड़ा प्रदर्शन है। तब तक जंतर-मंतर पर रातभर दीये जलेंगे और नारे गूंजते रहेंगे।

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