औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए मुंबई हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
औरंगजेब के मकबरे को लेकर राज्य में विवाद शुरू हो गया है। इसका असर राज्य के बजट सत्र में भी देखने को मिला। इसलिए, नागपुर में बड़ी हिंसा हुई। पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, वहीं अब यह मामला मुंबई उच्च न्यायालय पहुंच गया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। इस याचिका में मांग की गई है कि औरंगजेब के मकबरे को राष्ट्रीय स्मारक नहीं माना जाना चाहिए। इसमें औरंगजेब के मकबरे को ध्वस्त करने तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को इस मकबरे को राष्ट्रीय स्मारकों की सूची से बाहर करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
औरंगजेब का मकबरा छत्रपति संभाजी नगर के खुल्ताबाद में स्थित है। इस मकबरे को पिछली सरकार द्वारा राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया गया है। औरंगजेब के मकबरे को राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक का दर्जा दिए जाने के संबंध में एक याचिका दायर की गई है। इस स्थिति को हटाने के लिए अदालत में एक याचिका दायर की गई है।
केतन तिरोडकर नामक व्यक्ति ने मुंबई उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका में औरंगजेब के मकबरे को ध्वस्त करने और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को औरंगजेब के मकबरे को राष्ट्रीय स्मारकों की सूची से बाहर करने का निर्देश देने की मांग की गई है। क्योंकि यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अधिनियम, 1958 की धारा 3 के अनुरूप नहीं है। छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्थित औरंगजेब के मकबरे को 1952 में राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। अब हिंदूवादी संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मकबरे को राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक का दर्जा देना गलत है।