कांजुरमार्ग मेट्रो कार शेड की जमीन पर केंद ने जताया मालिकाना अधिकार, बैकफुट पर ठाकरे सरकार !
03 Nov, 2020
714
ब्यूरो रिपोर्ट/ in24न्यूज़/ मुंबई
मुंबई के पश्चिम उपनगर में स्थित आरे कॉलोनी जंगल से मेट्रो रेल कार्य शेड परियोजना को ठाकरे सरकार ने स्थानांतरित कर उसे कांजुरमार्ग में बनाने का फैसला किया लेकिन अब महाराष्ट्र की महा विकास आघाडी सरकार के फैसले पर ग्रहण मंडराने लगा है. सबसे बड़ी बात यह है कि केंद्र सरकार ने कारशेड की जमीन पर अपना दावा ठोक दिया है. अब मेट्रो कार शेड को लेकर केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने आ गए हैं. आपको बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फैसले को ठाकरे सरकार ने पलटकर कांजुरमार्ग में मेट्रो कार शेड बनाने की शुरुआत की है. राज्य सरकार का कहना है कि कार शेड के लिए जो जमीन उपलब्ध कराई जा रही है, वह पूरी तरह से मुफ्त है लेकिन अब पता चला है कि इस जमीन का मालिकाना हक केंद्र के पास है. केंद्रीय उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्धन मंत्रालय ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव संजय कुमार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि यह नमक की जमीन है और इसका अभी भी मालिकाना हक भारत सरकार के पास है. इससे पहले मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने इस जमीन पर परियोजना के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिसे खारिज कर दिया गया था. अब यहां कारशेड बनाया जा रहा है जो गलत है.
कुल मिलाकर चर्चा इस बात की होने लगी है कि बिना दस्तावेजों की जांच पड़ताल किये ही महा विकास आघाडी सरकार ने मेट्रो कार शेड को आरे कॉलोनी से उठाकर कांजुरमार्ग में शिफ्ट करने का फैसला कैसे किया. कांजुरमार्ग की जमीन को लेकर केंद्र सरकार का दावा ठोके जाने के बाद विपक्षी दल बीजेपी आक्रामक भूमिका में है. महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के विधायक आशीष ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर हमला बोलते हुए कहा कि अटकाने, भटकाने और लटकाने वाली सरकार है. वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार की पुत्री और सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र के पत्र पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि किसी भी कानून में राज्य की जमीन पर पहला अधिकार राज्य सरकार का होता है. केंद्र सरकार महाराष्ट्र के विकास कार्यों में हस्तक्षेप कर रही है जो राज्य के अधिकार का हनन है. केंद्र सरकार संघर्ष की बात करती है लेकिन ऐसा लगता है जैसे देश में अघोषित आपातकाल लग गया है.