टीमसी विधायक मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का छोड़ा साथ
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक कलह तेज होने के साथ ही पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन मित्रा, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए हैं। माना जा रहा है कि इससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर दरार और गहरी हो गई है। मदन मित्रा कोलकाता में आयोजित एक बैठक में विद्रोही समूह में शामिल हो गए। इसके बाद, ऋतब्रत बनर्जी ने उन्हें उत्तर 24 परगना जिले का अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की। इसे तृणमूल के संगठनात्मक स्तर पर एक और बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
पिछले कुछ दिनों में ममता बनर्जी के वफादार माने जाने वाले कई नेता बागी गुट में शामिल हो गए हैं। इससे पहले अनुब्रता मंडल बागी गुट में शामिल हुए और बीरभूम जिला अध्यक्ष का पद स्वीकार किया। इसके बाद रवींद्रनाथ घोष भी बागी गुट में शामिल हो गए और उन्होंने मांग की कि अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से दूर रखा जाए। अब मदन मित्रा के फैसले से पार्टी में असंतोष और भी स्पष्ट हो गया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़ा विभाजन हो गया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले एक गुट ने स्वतंत्र संगठनात्मक ढांचा तैयार कर पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा भी किया है। इससे पहले, बागी विधायकों ने अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष घोषित करके ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधे चुनौती दी थी।
मदन मित्रा के शामिल होने से बागी गुट की राजनीतिक शक्ति और भी मजबूत हो गई है। ममता बनर्जी के कभी सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक रहे मदन मित्रा के इस फैसले को तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसी आशंका है कि आने वाले दिनों में कुछ और वरिष्ठ नेता बागी गुट में शामिल हो सकते हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में घटनाक्रम और भी तीव्र हो सकता है।