पुर्तगाल ने बदले नागरिकता के नियम: भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों के लिए बढ़ी इंतजार की अवधि
यूरोपीय देश पुर्तगाल ने अपने राष्ट्रीयता और आव्रजन नियमों में बड़ा और सख्त बदलाव लागू कर दिया है। नए राष्ट्रीयता कानून के तहत भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और नाइजीरिया जैसे गैर-यूरोपीय संघ और गैर-पुर्तगाली भाषी देशों के नागरिकों के लिए नागरिकता हासिल करने की न्यूनतम कानूनी निवास अवधि को 5 साल से सीधे बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है। इस संशोधन के बाद पुर्तगाल में बसने का सपना देख रहे एशियाई और अन्य गैर-यूरोपीय प्रवासियों को अब नागरिकता का आवेदन करने के लिए दोगुना समय बिताना होगा। इसके साथ ही नए नियमों में यह भी साफ किया गया है कि 10 साल की इस अवधि की गिनती आवेदन जमा करने की तारीख से नहीं, बल्कि पहला रेजिडेंस परमिट कार्ड जारी होने के दिन से की जाएगी।
नागरिकता पाने की इस समय-सीमा को बढ़ाने के साथ-साथ पुर्तगाल सरकार ने एकीकरण और पात्रता की शर्तों को भी काफी कड़ा बना दिया है। अब नए आवेदकों के लिए यूरोपीय पुर्तगाली भाषा का ए-2 स्तर का ज्ञान साबित करने के अलावा पुर्तगाल के इतिहास, संस्कृति, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था की पर्याप्त जानकारी होना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, आवेदकों को अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रमाण देना होगा, और तीन साल या उससे अधिक की आपराधिक सजा पाने वाले व्यक्ति को नागरिकता के लिए पूरी तरह अयोग्य माना जाएगा। वहीं यूरोपीय संघ के देशों और पुर्तगाली भाषी देशों के नागरिकों के लिए नागरिकता की न्यूनतम निवास अवधि 7 साल तय की गई है।
पुर्तगाल सरकार ने यह कड़ा कदम देश में नागरिकता के आवेदनों की तेजी से बढ़ती संख्या और प्रशासनिक बैकलॉग को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 तक लगभग 6.9 लाख से अधिक नागरिकता आवेदन लंबित पड़े हुए थे, जिसे देखते हुए व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के मकसद से यह नया कानून पास किया गया है। हालांकि, सरकार ने उन प्रवासियों को राहत दी है जिन्होंने 19 मई 2026 को नया कानून प्रभावी होने से पहले अपने आवेदन जमा कर दिए थे; ऐसे सभी पुराने मामलों का निपटारा पहले से चले आ रहे 5 साल वाले नियम के तहत ही किया जाएगा।