एक बार फिर शुरू हुई मनसे कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी
21 Oct, 2017
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ब्यूरो रिपोर्ट / in24 न्यूज़
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 20 अक्टूबर तक सभी अवैध फेरीवालों को रेलवे ब्रिजों से हटने का फरमान सुनाया था, इस फरमान की अनदेखी करने वाले फेरीवालों को मनसे कार्यकर्ताओं के गुस्से का शिकार होना पड़ा,जिसमे एक दर्जन से ज्यादा मनसे कार्यकर्ताओं ने ठाणे रेलवे स्टेशन पर फेरीवालों की पिटाई की और उनका सामान फेंक दिया। शनिवार की सुबह एक दर्जन मनसे कार्यकर्ता अचानक झंडे और डंडे लेकर ठाणे रेलवे स्टेशन पहुंचे और फुट ओवर ब्रिज पर खड़े फेरीवालों पर हमला कर दिया और दौड़ा-दौड़ा कर उन्हें पीटा साथ ही उनके सामान को भी फेंक दिया। बाद में मौके पर पहुंची जीआरपी टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। अचानक हुए इस हंगामे के कारण कुछ देर के लिए रेलवे स्टेशन पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोगों को पहले लगा कि दो गुटों में आपस में मारपीट हो गई है। गौरतलब है कि एलफिन्स्टन रेलवे हादसे के विरोध में 5 अक्टूबर को मनसे की तरफ से राज ठाकरे की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक मोर्चा निकाला था। इस मोर्च में राज ठाकरे ने रेलवे और प्रशासन को चेतावनी दी थी कि अवैध फेरीवालों को 15 दिन के अंदर रेलवे परिसर से हटाया जाए नहीं तो मनसे अपने स्टाइल से हटाएगी

राज ठाकरे का आरोप है कि मुंबई के रेलवे स्टेशनों के आसपास फेरीवालों पर कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर पिछले बुधवार को उन्होंने मुंबई महानगर पालिका आयुक्त अजय मेहता से मुलाकात की थी,जहां उन्होंने कहा था, "अवैध फेरीवालों की संख्या ज्यादा है और लाइसेंस लेकर स्टॉल लगाने वालों की संख्या कम, इसलिए अवैध तरीके से धंधा करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"

इस दौरान राज ने कार्रवाई का विरोध करने वाले मराठी भाषी फेरीवालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा,"स्टेशन पर से हटाए जाने का विरोध करने वाले मराठी फेरीवालों से मैं पूछना चाहता हूं कि स्टेशन के फुटओवर ब्रिज और फुटपाथ पर चलने वाले लोग कौन हैं?" राज ने कहा था कि सवाल किसी को बेरोजगार करने का नहीं है लेकिन जो रेलवे के यात्री टैक्स भरते हैं यदि अवैध तरीके से स्टेशनों पर फेरीवालों के बैठने से उनको चलने में मुश्किल होती है तो यह भी उचित नहीं है, हम यह क्यों भूल जाते हैं कि फुटपाथ पर चलने वाले लोग भी मराठी हैं।
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