Breaking News

सीजेपी का बड़ा ऐलान नेशनल वर्किंग कमेटी घोषित, पुणे से शुरू होगा छात्रों का आंदोलन

07 Aug, 2026 14

देश में बढ़ते एग्जाम घोटालों और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर आवाज उठाने वाला सीजेपी अब एक औपचारिक संगठन बन गया है। जिसकी शुरुआत एक सटायर सोशल मीडिया पेज से हुई थी, उसने अब अपनी नेशनल वर्किंग कमेटी का ऐलान कर दिया है। पुणे में हुए एक बड़े कार्यक्रम में  सीजेपी   ने अपनी कमेटी के नाम, प्रवक्ताओं और आगे की रणनीति का खुलासा किया।  सीजेपी   के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि छात्रों के मुद्दे संसद तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, एग्जाम में देरी और पारदर्शिता की कमी ने पूरे देश के युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है। इसी को लेकर  सीजेपी अब देशव्यापी आंदोलन चलाएगा। पुणे के इस कार्यक्रम में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुईं और उन्होंने छात्रों का समर्थन किया।

 कमेटी में कौन-कौन और क्या होगी भूमिका

सीजेपी   ने 3 मुख्य प्रवक्ताओं की नियुक्ति की है ताकि मीडिया और जनता तक बात पहुंच सके। सौरव दास को चीफ स्पोक्सपर्सन बनाया गया है। और एक जांच पत्रकार हैं और नवंबर 2025 में दिल्ली के इंडिया गेट पर हुए प्रदूषण विरोध प्रदर्शन में भी आगे थे। उनके साथ विजेता दहिया को प्रवक्ता बनाया गया है। विजेता राजनीतिक शोधकर्ता, लेखक और फिल्ममेकर हैं और उनका काम सिविल सोसाइटी और बुद्धिजीवियों से संवाद बढ़ाना होगा। तीसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका हैं जो पढ़े-लिखे युवा और टेक प्रोफेशनल्स के बीच  सीजेपी   का संदेश ले जाएंगे।  सीजेपी   ने बयान में कहा कि "भारत की राजनीति की दिशा बदलनी है और इसकी अगुवाई नई पीढ़ी करेगी।" कमेटी का मकसद सिर्फ विरोध करना नहीं बल्कि पॉलिसी लेवल पर बदलाव लाना है।

 पुणे से दिल्ली तक चलेगा आंदोलन

सीजेपी   ने अपने आंदोलन का रोडमैप भी जारी कर दिया। शुरुआत 11 जून को पुणे से होगी। पुणे यूनिवर्सिटी में पहले ही एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो चुका है जिसमें हजारों छात्र जुटे थे और सोनम वांगचुक ने भी भाषण दिया था। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से लखनऊ, अमृतसर, बेंगलुरु, जयपुर और हैदराबाद में प्रदर्शन होंगे।  सीजेपी   की सबसे बड़ी मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें क्योंकि उनके कार्यकाल में आनईईटी , सीयूईटी और अन्य एग्जाम में लगातार गड़बड़ियां हुई हैं। अगर 20 जून तक इस्तीफा नहीं हुआ तो  सीजेपी   ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया है।  सीजेपी   का कहना है कि ये आंदोलन किसी पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही के लिए है।

एजुकेशन मेनिफेस्टो में क्या है खास

पुणे में  सीजेपी   ने अपना "एजुकेशन मेनिफेस्टो"भी जारी किया। इसमें 5 बड़ी मांगें रखी गई हैं। पहली, पेपर लीक से प्रभावित हर छात्र को मुआवजा मिले। दूसरी, जिन एग्जाम में देरी हुई उनके लिए बैकअप शेड्यूल बने। तीसरी, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पूरी पारदर्शिता हो और छात्रों को कॉपी देखने का अधिकार मिले। चौथी, देरी की वजह से जिन छात्रों की उम्र निकल गई उन्हें ऑटोमैटिक एज रिलैक्सेशन दिया जाए। पांचवीं, एनटीए और अन्य एग्जाम एजेंसियों की टेक्नोलॉजी का हर साल थर्ड पार्टी ऑडिट हो।  सीजेपी   ने कहा कि वो हिंसा के खिलाफ हैं और उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक रहेगा। अभिजीत दिपके ने कहा कि "हम सरकार से नफरत नहीं करते, हम जवाब चाहते हैं।
.

अब आगे क्या और कितना बड़ा होगा  सीजेपी 

सीजेपी   का ये कदम छात्र राजनीति में एक नए प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया से निकला ये समूह अब जमीन पर उतर चुका है और इसकी कमेटी बनाने से संगठन को मजबूती मिलेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में चुनाव से पहले शिक्षा एक बड़ा मुद्दा बन सकता है और  सीजेपी   उस नैरेटिव को लीड कर सकता है। अभी  सीजेपी   के पास कोई चुनावी मंच नहीं है लेकिन उसका दबाव सरकार पर बढ़ रहा है। 20 जून का जंतर-मंतर धरना इसकी पहली बड़ी परीक्षा होगी। अगर हजारों छात्र वहां पहुंचते हैं तो सरकार को बातचीत करनी पड़ेगी। फिलहाल  सीजेपी   ने साफ कर दिया है कि वो रुकेगा नहीं, क्योंकि "सवाल पूछना ही लोकतंत्र है।

 

 

 

 

अन्य खबरे