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बंपियर आसमान एयर इंडिया की टर्बुलेंस वाली फ्लाइट ने खोली पोल, क्लाइमेट चेंज से हवाई सफर होगा और खतरनाक

07 Aug, 2026 16

एयर इंडिया की एक फ्लाइट में अचानक तेज टर्बुलेंस आने से यात्रियों में दहशत फैल गई। लेकिन एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ये सिर्फ इत्तेफाक नहीं है। क्लाइमेट चेंज की वजह से अब आसमान पहले से 55% ज्यादा बंपियर हो चुका है। अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल वार्मिंग से जेट स्ट्रीम की हवा तेज हो रही है जिससे क्लियर एयर टर्बुलेंस यानी सीएटी बढ़ रही है। इसका मतलब है कि अब बिना बादल के भी फ्लाइट हिल सकती है और पायलट को पहले से पता भी नहीं चलेगा। एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी एयरलाइंस को अब नए नियम और सुरक्षा उपाय अपनाने पड़ रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले 20-30 सालों में ये समस्या और बढ़ेगी।

 क्लियर एयर टर्बुलेंस क्या है और क्यों बढ़ रही है

क्लियर एयर टर्बुलेंस 18,000 फीट से ऊपर होती है जहां बादल नहीं होते। इसलिए इसे रडार से पकड़ना मुश्किल होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर पॉल विलियम्स का कहना है, "आने वाले दशकों में गंभीर टर्बुलेंस दोगुनी या तीन गुनी हो सकती है। अभी 10 मिनट की टर्बुलेंस है तो वो 20-30 मिनट हो जाएगी"। इसकी वजह केओ२ है। दक्षिण की हवा उत्तर की हवा से ज्यादा गर्म हो रही है जिससे जेट स्ट्रीम तेज हो रही है। 1979 से 2020 के बीच नॉर्थ अटलांटिक में गंभीर टर्बुलेंस 55% बढ़ी है। यूके के क्लाइमेट एक्सपर्ट मनोज जोशी भी मानते हैं कि दशकों में सीएटी का बढ़ना सीधे क्लाइमेट चेंज से जुड़ा है।

भारत के ऊपर टर्बुलेंस 200% तक बढ़ सकती है

भारत भी इससे अछूता नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग की रिपोर्ट कहती है कि 2050 से 2080 के बीच उत्तर भारत में क्लियर एयर टर्बुलेंस 100 से 200% तक बढ़ सकती है। ये सबसे ज्यादा मार्च से मई के बीच होगी। इसके अलावा पूर्व एशिया, उत्तरी अफ्रीका, प्रशांत और मध्य पूर्व में भी टर्बुलेंस बढ़ेगी। हाल में ही इंडिगो की दिल्ली-श्रीनगर फ्लाइट में ओलावृष्टि के साथ तेज झटके लगे थे। यात्रियों ने कहा था कि उन्हें लगा जान चली जाएगी। 2022 में स्पाइसजेट की मुंबई-दुर्गापुर फ्लाइट में 17 लोग घायल हुए थे। 2024 में सिंगापुर एयरलाइंस की फ्लाइट में 1 की मौत और 70 लोग घायल हुए थे।

एयरलाइंस क्या कर रही हैं

एयरलाइंस अब टर्बुलेंस को क्लाइमेट रिस्क मानकर चल रही हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि दुनिया भर में हो रही घटनाएं दिखाती हैं कि मौसम की वजह से टर्बुलेंस पहले से ज्यादा हो गई है। इसलिए क्रू को कहा गया है कि यात्रियों से कहें कि सीट बेल्ट का साइन न होने पर भी बेल्ट बांध कर रखें। अगर कॉकपिट से टर्बुलेंस का अलर्ट आए तो खाना-पीना तुरंत बंद कर दिया जाता है। इंडिगो नई सॉफ्टवेयर और सेफ्टी अनाउंसमेंट टेस्ट कर रही है। वैज्ञानिक 2 तरीके सुझा रहे हैं - फ्लाइट का रास्ता बदलना और एलईडीएआर जैसी तकनीक से हवा की घनत्व जांचना। लेकिन रास्ता बदलने से ईंधन और किराया दोनों बढ़ेगा।

 अब कैसा होगा हवाई सफर

टर्बुलेंस सिर्फ कॉफी गिराने की बात नहीं है। हर साल सैकड़ों यात्री और क्रू सदस्य घायल होते हैं। अमेरिका में ही इसका खर्च 150-500 मिलियन डॉलर सालाना है। "टर्बुलेंस में बिताया हर एक मिनट जहाज की टूट-फूट और चोट का खतरा बढ़ाता है"। आधुनिक विमान टर्बुलेंस झेल सकते हैं लेकिन अंदर बैठे लोगों को खतरा रहता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका असली हल ग्रीनहाउस गैस कम करना है क्योंकि एविएशन खुद 3.5% ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है। तब तक एक ही उपाय है - सीट बेल्ट बांध कर रखें। 2026 के बाद आसमान और ज्यादा बंपियर होने वाला है।

 

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